नई दिल्ली. इंडिया गठबंधन की बुधवार को हुई बैठक में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी काफी नजदीक नजर आईं। बैठक के दौरान दोनों नेता साथ बैठे दिखाई दिए। उनके पास ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले भी थीं। बैठक के बाद ममता बनर्जी का एक बयान वायरल हो रहा है जिसमें वे लोकसभा सांसद राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद पर उम्मीदवारी के सवाल पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। दोनों नेताओं की नजदीकी ने गठबंधन के अंदर की गतिशीलता को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
ममता ने सोनिया को मनाया?
रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया है कि इंडिया गठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में आने के लिए ममता बनर्जी ने ही सोनिया गांधी को मनाया था। उन्होंने कांग्रेस सांसद से मार्गदर्शन देने के लिए कहा था। वहीं बैठक के दौरान जब पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव आयोग पर निशाना साध रही थीं तब सोनिया ने उनकी पीठ थपथपाई। यह इशारा दोनों के बीच समन्वय को दर्शाता है। हालांकि आधिकारिक रूप से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। ममता की पहल से सोनिया की उपस्थिति सुनिश्चित हुई।
राहुल गांधी के पीएम पद पर सवाल
बुधवार को ही जब पत्रकारों ने ममता बनर्जी से पूछा कि क्या साल 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे तो इस सवाल पर वह चुप्पी साधती हुई नजर आईं। उन्होंने कहा कि हम कल प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। राहुल गांधी के नाम आते ही ममता ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। यह टालमटोल गठबंधन के अंदर नेतृत्व के सवाल को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर से हवा देने वाली है। पश्चिम बंगाल चुनाव हारने से पहले भी टीएमसी कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाती रही है।
पहले भी दिखी थी करीबी
यह पहला मौका नहीं है जब दोनों नेता साथ नजर आईं। इससे पहले जून में हुई मीटिंग में भी दोनों नेता साथ बैठी थीं और गले मिलते हुए फोटो भी खूब वायरल हुआ था। खास बात है कि तब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए कुछ ही दिन हुए थे और ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। हार के बावजूद दोनों के बीच नजदीकी बनी रही। बुधवार की बैठक में फिर से यह नजदीकी दिखाई दी। गठबंधन की एकजुटता का संदेश देने वाली ये तस्वीरें चर्चा में रहीं।
टीएमसी का पुराना रुख
पश्चिम बंगाल चुनाव हारने से पहले कई मौकों पर अविभाजित टीएमसी कांग्रेस के नेतृत्व पर सवाल उठाती रही है। ममता बनर्जी का राहुल गांधी के पीएम उम्मीदवारी वाले सवाल पर चुप रहना इसी पुरानी हिचक को दर्शाता है। टीएमसी गठबंधन में अपनी स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश करती रही है। कांग्रेस के साथ तालमेल रखते हुए भी नेतृत्व के सवाल पर स्पष्टता से बचने की रणनीति अपनाई जा रही है। यह रुख इंडिया ब्लॉक की आंतरिक गतिशीलता को रेखांकित करता है।
गठबंधन की राजनीति
सोनिया गांधी की उपस्थिति और ममता बनर्जी की पहल से गठबंधन में एकजुटता का संदेश गया है। वहीं राहुल गांधी के नाम पर ममता की टालमटोल से नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस और अन्य दलों के बीच समीकरण जटिल बने हुए हैं। बैठक में नजदीकी दिखाने के बावजूद प्रमुख पदों पर सहमति बनाना चुनौती बना हुआ है। आगे की प्रेस कॉन्फ्रेंस और बयानों से स्थिति और साफ होने की उम्मीद है। गठबंधन की राजनीति में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।