नई दिल्ली. सर्दियां चौखट पर खड़ी हैं लेकिन अल नीनो का साया दरवाजा रोककर खड़ा है। इसके साथ ही पराली जलाने का मौसम भी नजदीक आ गया है। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली समेत इससे सटे राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की हवा बदलने वाली है। बारिश के होने से हवा में जमा प्रदूषक तत्व धुल जाते हैं लेकिन सुपर अल नीनो के चलते बारिश की संभावना कम हो गई है। ऐसे में पराली के धुएं से प्रदूषण के और भी ज्यादा बढ़ने की आशंका है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च के फाउंडर प्रोफेसर गुफरान बेग ने इसे इस सदी की अनोखी घटना बताया है।
प्रशांत महासागर का तापमान और असर
प्रोफेसर गुफरान बेग ने कहा कि प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही 3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ चुका है। इससे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कम होंगे। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के ज्यादा होने से दिल्ली में बारिश होती है और कुछ समय के लिए प्रदूषक साफ हो जाते हैं लेकिन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कम होने से प्रदूषण का जमावड़ा ज्यादा होगा। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कम होने की वजह से हवा की गति धीमी होने की संभावना है जिससे प्रदूषक तत्व जमा होंगे और हवा स्थिर हो जाएगी। सुपर अल नीनो की वजह से सितंबर में भी मई-जून जैसी गर्मी पड़ रही है।
हल्की सर्दी और तापमान का अनुमान
प्रोफेसर गुफरान बेग का मानना है कि इस साल सर्दियां हल्की रहने की उम्मीद है क्योंकि तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना नहीं है। सुपर अल नीनो के प्रभाव से ठंड के मौसम में भी तापमान में ज्यादा गिरावट होने का अनुमान नहीं लगाया जा रहा है। धीमी हवा और कम बारिश के कारण प्रदूषक लंबे समय तक हवा में बने रह सकते हैं। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। सर्दी के मौसम में प्रदूषण का स्तर आमतौर पर ऊंचा रहता है और इस बार परिस्थितियां और प्रतिकूल हो सकती हैं।
पराली जलाने के मामले शुरू
देश में ज्यादातर अक्टूबर के महीनों में खेतों में फसल की कटाई शुरू होती है इसके बाद ज्यादातर किसान पराली जलाते हैं जिससे प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि उस हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। ठंड का मौसम और पराली का धुआं हवा को और भी खराब कर देता है। अभी ठंड का मौसम आया भी नहीं है कि पराली जलाने के मामले भी सामने आने लगे हैं। 15 से 23 सितंबर के बीच पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में ऐसे 47 मामले सामने आ चुके हैं। पराली जलाने का सबसे ज्यादा समय दीवाली के आसपास होता है।
दीवाली से पहले बढ़ती चिंता
इस बार दीवाली 8 नवंबर की है और अभी से पराली जलाने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। अभी खेतों में आग लगने की घटनाएं कम हैं लेकिन अक्टूबर में इनकी रोजाना संख्या बढ़ेगी और नवंबर के शुरुआती 10 दिनों में यह सबसे ज्यादा होगी। आमतौर पर पराली जलाने का काम 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच होता है। सुपर अल नीनो, कम बारिश और पराली का संयोजन दिल्ली समेत पांच राज्यों के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन और पराली नियंत्रण के उपायों की जरूरत बढ़ गई है।