सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने कहा कि जिन कुछ लोगों को भारतीय नागरिकता पर संदेह के आधार पर बांग्लादेश भेजा गया था, उन्हें वापस भारत लाया जाएगा। इसके बाद उनकी नागरिकता के दावे की दोबारा जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ के सामने कहा कि सरकार संबंधित लोगों को वापस लाएगी और उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की निष्पक्ष जांच कराएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए लिया जा रहा है और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं माना जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें कुछ बंगाली भाषी लोगों को वापस भारत लाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने केंद्र के आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया।
नागरिकता दावे की फिर से होगी जांच
प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने अदालत से सॉलिसिटर जनरल के बयान को रिकॉर्ड में लेने की मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार संबंधित लोगों को वापस लाकर उनकी नागरिकता की जांच करेगी।
एक साल पहले हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश
सितंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनाली खातून, उनके पति दानिश शेख और बेटे साबिर शेख को वापस भारत लाने का निर्देश दिया था। एक अन्य मामले में स्वीटी बीबी और उनके बेटों कुर्बान और इमाम को भी वापस लाने का आदेश दिया गया था। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने मानवीय आधार पर गर्भवती सुनाली खातून और उनके बेटे को वापस लाने पर सहमति जताई थी। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सुझाव दिया था कि नागरिकता दावे की जांच के लिए संबंधित लोगों को वापस लाया जाए।