मुंबई: इंग्लैंड और आयरलैंड के सीमित ओवरों के दौरे के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों और बार-बार सामने आई ऐंठन (क्रैम्प्स) की शिकायतों के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने टीम इंडिया के फिटनेस मूल्यांकन तंत्र में बड़ा बदलाव किया है। बोर्ड ने अब ब्रोंको टेस्ट (Bronco Test) और 2 किलोमीटर रनिंग टेस्ट (2K Run Test) के लिए स्पष्ट और एक समान मानक तय कर दिए हैं, ताकि सभी खिलाड़ियों का मूल्यांकन एक ही पैमाने पर किया जा सके।
ब्रोंको और 2K टेस्ट के लिए तय किए गए नए मानक
BCCI के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, 1,200 मीटर के ब्रोंको टेस्ट को खिलाड़ियों के लिए 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। वहीं, 2 किलोमीटर की दौड़ 9 से 10 मिनट के भीतर पूरी करनी होगी। बोर्ड का मानना है कि इन तय मानकों से खिलाड़ियों की सहनशक्ति, फुर्ती और मैच फिटनेस का बेहतर आकलन किया जा सकेगा। पहले इन टेस्टों के लिए एक समान आधार तय नहीं होने के कारण मूल्यांकन को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती थी।
यो-यो टेस्ट की जगह ब्रोंको टेस्ट पर जोर
टीम इंडिया के नए स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स के कार्यभार संभालने के बाद फिटनेस परीक्षण में बदलाव किया गया है। पहले खिलाड़ियों की फिटनेस का प्रमुख पैमाना यो-यो टेस्ट था, लेकिन अब ब्रोंको टेस्ट को अधिक महत्व दिया जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि यह टेस्ट मैच जैसी परिस्थितियों में खिलाड़ियों की वास्तविक शारीरिक क्षमता को बेहतर तरीके से दर्शाता है।
फिटनेस प्रबंधन पर उठे सवाल
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कुछ समय से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और टीम प्रबंधन के बीच फिटनेस मानकों को लेकर तालमेल की कमी सामने आई थी। आरोप लगे कि कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट न होने के बावजूद खेलने की अनुमति दे दी गई। इंग्लैंड दौरे के दौरान तेज गेंदबाज हर्षित राणा को गंभीर क्रैम्प्स की समस्या हुई थी। रिपोर्टों में दावा किया गया कि उनका वजन निर्धारित सीमा से अधिक था, जिसके बाद उन्हें वजन नियंत्रित रखने की सलाह दी गई। वहीं, मोहम्मद सिराज समेत कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को नए फिटनेस मानकों की जानकारी पहले से नहीं होने की बात भी सामने आई।
फिजियो और सपोर्ट स्टाफ को सख्त निर्देश
खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच BCCI सचिव देवजीत सैकिया और बोर्ड अधिकारियों ने टीम फिजियो कमलेश जैन से जवाब-तलब किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी खिलाड़ी के स्टार दर्जे या अनुभव से ऊपर उसकी फिटनेस होगी। यदि कोई खिलाड़ी निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसकी रिपोर्ट तुरंत बोर्ड को सौंपी जाएगी।
फिटनेस पर रहेगा विशेष फोकस
BCCI का मानना है कि सख्त और पारदर्शी फिटनेस मानकों से खिलाड़ियों की चोटों में कमी आएगी और टीम के प्रदर्शन में निरंतरता बनी रहेगी। आने वाले अंतरराष्ट्रीय दौरों और बड़े टूर्नामेंटों को देखते हुए बोर्ड अब फिटनेस को चयन प्रक्रिया का अहम आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।