नई दिल्ली. देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में शामिल नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए टेलीग्राम मंच पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की सिफारिश पर उठाया गया है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के जरिए संगठित तरीके से फैलाए जा रहे भ्रामक दावों और संभावित धोखाधड़ी को रोकने के लिए कठोर कार्रवाई आवश्यक हो गई थी।
संदेश संपादन फीचर बना जांच एजेंसियों की चिंता
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार टेलीग्राम का संदेश संपादन फीचर हाल के समय में जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनकर उभरा है। आरोप है कि कुछ समूह परीक्षा से पहले सामान्य संदेश साझा करते थे और परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हीं संदेशों को संपादित कर वास्तविक प्रश्नपत्र जोड़ देते थे। चूंकि संपादन के बाद भी मूल समय-मुहर यथावत दिखाई देती थी, इसलिए यह भ्रम पैदा किया जाता था कि प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध था। इस तकनीक का उपयोग कथित रूप से फर्जी पेपर लीक के प्रमाण तैयार करने के लिए किया जा रहा था।
भ्रामक सूचनाओं पर लगाम लगाने की कोशिश
परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखना किसी भी शैक्षणिक व्यवस्था की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग मंचों पर प्रसारित होने वाले अपुष्ट दावों से छात्रों और अभिभावकों में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। कई बार फर्जी दस्तावेज और संपादित संदेश व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने तकनीकी स्तर पर हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है।
सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत जारी हुए आदेश
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के अंतर्गत की गई है। इस प्रावधान के तहत सरकार को राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में ऑनलाइन मंचों के खिलाफ आवश्यक निर्देश जारी करने का अधिकार प्राप्त है। संबंधित आदेशों को गोपनीय श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि ऐसे निर्देशों को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जाता। हालांकि अधिकारियों ने पुष्टि की है कि परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
नीट पुनर्परीक्षा पर विशेष नजर
आगामी पुनर्परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पहले से ही सतर्क रुख अपनाए हुए है। परीक्षा केंद्रों की निगरानी बढ़ाने, डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित अनियमितताओं को रोकने के लिए कई अतिरिक्त उपाय लागू किए गए हैं। एजेंसी का मानना है कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में किसी भी प्रकार की अफवाह या तकनीकी हेरफेर को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
डिजिटल युग में परीक्षा सुरक्षा की नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक ने जहां संचार को आसान बनाया है, वहीं परीक्षा सुरक्षा के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संपादन उपकरणों और एन्क्रिप्टेड मंचों के बढ़ते उपयोग ने जांच एजेंसियों के लिए नई जटिलताएं पैदा की हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक निगरानी पर्याप्त नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही, तकनीकी निगरानी और त्वरित कार्रवाई भविष्य की परीक्षा व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।