अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका दिया। शीर्ष अदालत ने ट्रंप द्वारा दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति को इतने देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले का प्रभाव अमेरिकी अर्थव्यवस्था, उपभोक्ताओं और राष्ट्रपति की व्यापार नीतियों पर गहरा पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन ने पहले कहा था कि इस फैसले से आयातकों को भारी रिफंड देना पड़ सकता है और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों में बदलाव करना पड़ेगा।
राष्ट्रपति नहीं, कांग्रेस को टैरिफ लगाने का अधिकार
मुख्य न्यायाधीश जॉन जी. रॉबर्ट्स जूनियर ने बहुमत के फैसले में लिखा कि 1970 के दशक के आपातकालीन कानून में राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति असीमित और एकतरफा टैरिफ लगाने का दावा नहीं कर सकते, जब तक कि कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति न हो।जस्टिस क्लैरेंस थॉमस, सैमुअल ए. एलिटो जूनियर और ब्रेट एम. कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई।
ट्रंप के टैरिफ का इतिहास
पिछले साल ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का हवाला देते हुए 100 से अधिक देशों से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाए। उनका उद्देश्य व्यापार घाटे को कम करना और अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना था। हालांकि, टैरिफ के कारण व्यवसाय प्रभावित हुए और उपभोक्ता कीमतें बढ़ गईं।
टैरिफ के खिलाफ कानूनी लड़ाई
एक दर्जन अमेरिकी राज्य और छोटे व्यवसायों ने सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया। उनका तर्क था कि राष्ट्रपति ने संविधान के तहत कांग्रेस को दिए अधिकार में अवैध हस्तक्षेप किया। प्रभावित व्यवसायों ने कहा कि टैरिफ से उनके संचालन में बाधा आई और कर्मचारियों की संख्या घटनी पड़ी।
ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया
ट्रंप के शीर्ष व्यापार वार्ताकार जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि अदालत द्वारा अमान्य किए गए आपातकालीन टैरिफ के स्थान पर प्रशासन अन्य कानूनों के तहत शुल्क लगाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत कुछ टैरिफ लगा चुके हैं।
शुरुआती टैरिफ
ट्रंप ने चीन, कनाडा और मेक्सिको से आयातित सामान पर टैरिफ लगाया। उनका कहना था कि इन देशों द्वारा फेंटानिल की तस्करी रोकने में असफलता के कारण यह कदम जरूरी था।
निचली अदालतों के फैसले
तीन निचली अदालतों ने टैरिफ को अवैध ठहराया था। फेडरल सर्किट अपील अदालत ने 7-4 के फैसले में कहा कि आपातकालीन कानून राष्ट्रपति को इतने व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। बहुमत ने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस टैरिफ का अधिकार देना चाहती है, तो वह इसे स्पष्ट रूप से करेगी।
इस फैसले से स्पष्ट है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति की एकतरफा शक्तियों पर रोक लगाई है और टैरिफ लगाने का अंतिम अधिकार केवल कांग्रेस को दिया है।
Comments (0)