पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद नई बीजेपी सरकार ने कोलकाता के साल्टलेक स्थित विवेकानंद युवभारती क्रीड़ांगन (सॉल्टलेक स्टेडियम) के बाहर लगी विवादास्पद फुटबॉल थीम वाली मूर्ति को हटा दिया है। यह मूर्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में लगाई गई थी, जिसमें ‘विश्व बांग्ला’ का लोगो भी शामिल था। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।
23 मई को हटाई गई मूर्ति
राज्य सरकार की ओर से 23 मई को स्टेडियम के बाहर स्थापित इस प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई की गई। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर मूर्ति को हटाने के साथ उसके ढांचे को भी तोड़ना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
पहले हटे ‘विश्व बांग्ला’ लोगो
इससे पहले 17 और 18 मई को विवेकानंद युवभारती क्रीड़ांगन के मुख्य प्रवेश द्वारों पर लगे ‘विश्व बांग्ला’ लोगो को भी हटा दिया गया था। उनकी जगह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ को स्थापित किया गया। इसे नई सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों में राष्ट्रीय प्रतीकों को प्राथमिकता देने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
खेल मंत्री ने बताया ‘भद्दा ढांचा’
राज्य के खेल मंत्री ने इस मूर्ति के डिजाइन पर सवाल उठाते हुए इसे स्टेडियम की विरासत के अनुरूप न होने वाला “भद्दा और अशोभनीय ढांचा” बताया था। मंत्री का कहना था कि खेल परिसर की गरिमा और पहचान को ध्यान में रखते हुए बदलाव जरूरी था।
2017 फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप से पहले हुई थी स्थापना
गौरतलब है कि यह मूर्ति और ‘विश्व बांग्ला’ लोगो साल 2017 फीफा अंडर-17 विश्व कप से पहले तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान लगाए गए थे। उस समय इसे बंगाल की ब्रांडिंग और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयास के तौर पर पेश किया गया था।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस
मूर्ति हटाने और प्रतीकों में बदलाव को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे नई सरकार का प्रशासनिक फैसला बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध और पहचान बदलने की कोशिश करार दे रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।