देश में थोक मूल्य आधारित महंगाई दर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी जून 2026 के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार थोक मूल्य सूचकांक आधारित वार्षिक महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि मई 2026 में यह 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे महीने दर्ज हुई यह वृद्धि संकेत देती है कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है। सभी वस्तुओं के समग्र सूचकांक में भी वृद्धि दर्ज की गई और यह मई के 109.9 से बढ़कर जून में 110.2 हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका प्रभाव खुदरा बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल, कृषि क्षेत्र का असर भी स्पष्ट
जून के आंकड़ों में प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी सबसे अधिक चर्चा का विषय रही। इस श्रेणी में खाद्य तथा गैर-खाद्य कृषि उत्पाद दोनों शामिल होते हैं। मई में जहां इस वर्ग की महंगाई दर 4.99 प्रतिशत थी, वहीं जून में यह बढ़कर 7.00 प्रतिशत पर पहुंच गई। संबंधित सूचकांक भी बढ़कर 116.1 दर्ज किया गया। कृषि उत्पादों की उपलब्धता, मौसम की स्थिति, परिवहन लागत और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा प्रभाव इस श्रेणी पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कृषि उत्पादन सामान्य बना रहता है और वितरण व्यवस्था बेहतर होती है तो आने वाले महीनों में इस क्षेत्र में कुछ राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
ईंधन एवं बिजली की लागत अब भी ऊंची, उद्योगों पर बना हुआ दबाव
ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में महंगाई दर सबसे अधिक 27.41 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि यह मई में दर्ज 30.33 प्रतिशत की तुलना में कुछ कम है, फिर भी यह स्तर काफी ऊंचा माना जा रहा है। जून में इस श्रेणी का सूचकांक 111.1 दर्ज किया गया। ऊर्जा लागत में वृद्धि का प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विनिर्माण, कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्र सहित लगभग सभी आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। ऊर्जा की ऊंची कीमतें उत्पादन लागत बढ़ाती हैं, जिसका असर अंततः उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देता है।
निर्मित उत्पादों में स्थिरता, लेकिन लागत का दबाव बरकरार
निर्मित उत्पादों के क्षेत्र में जून के दौरान कोई बड़ा परिवर्तन दर्ज नहीं किया गया। इस श्रेणी की महंगाई दर मई की तरह ही 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि सूचकांक 107.8 दर्ज किया गया। यद्यपि दर में बढ़ोतरी नहीं हुई, फिर भी यह स्तर यह दर्शाता है कि उद्योगों की उत्पादन लागत अब भी ऊंची बनी हुई है। कच्चे माल, ऊर्जा और परिवहन पर बढ़े खर्च का प्रभाव विनिर्माण क्षेत्र पर लगातार बना हुआ है। यदि आने वाले महीनों में इन लागतों में कमी नहीं आती तो उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी इसका असर जारी रह सकता है।
खाद्य वस्तुओं की महंगाई में बड़ा उछाल, आम परिवारों पर बढ़ेगा असर
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में दर्ज हुई बढ़ोतरी आम नागरिकों के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय बनकर सामने आई है। थोक खाद्य सूचकांक आधारित महंगाई दर मई के 4.49 प्रतिशत से बढ़कर जून में 6.14 प्रतिशत हो गई। खाद्यान्न, सब्जियां, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है। इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ने की आशंका रहती है, क्योंकि भोजन से जुड़ी वस्तुएं प्रत्येक परिवार के मासिक खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। यदि खाद्य महंगाई पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को और अधिक आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
पेट्रोलियम उत्पाद, धातु और रसायन बने महंगाई के प्रमुख कारण, अप्रैल के आंकड़ों में भी संशोधन
मंत्रालय के अनुसार जून में थोक महंगाई बढ़ने के पीछे पेट्रोलियम आधारित खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, आधारभूत धातुएं तथा रसायन एवं रासायनिक उत्पाद प्रमुख कारण रहे। इन क्षेत्रों में लागत बढ़ने से समग्र थोक मूल्य सूचकांक पर व्यापक प्रभाव पड़ा। साथ ही अप्रैल 2026 के अंतिम आंकड़ों में भी संशोधन किया गया है। पहले अप्रैल की थोक महंगाई दर 8.26 प्रतिशत बताई गई थी, जिसे संशोधित कर 8.36 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी प्रकार समग्र सूचकांक को 108.8 से बढ़ाकर 108.9 किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जुलाई 2026 के आंकड़े 14 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे, जिनमें थोक मूल्य सूचकांक के साथ-साथ OPPI और परीक्षण स्तर के IPPI से जुड़े आंकड़े भी शामिल होंगे। इन आंकड़ों पर उद्योग, बाजार और आर्थिक विशेषज्ञों की विशेष नजर रहेगी क्योंकि इन्हीं के आधार पर आगामी महीनों की महंगाई की दिशा का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा।