सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2025 में बढ़कर 0.83 प्रतिशत हो गई। इससे पहले नवंबर में यह शून्य से नीचे 0.32 प्रतिशत और अक्टूबर में शून्य से नीचे 1.21 प्रतिशत रही थी। लगातार दो महीनों की गिरावट के बाद थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों में मांग और कीमतों के दबाव को दर्शाती है।
विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों का असर
उद्योग मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि दिसंबर में मुद्रास्फीति बढ़ने का मुख्य कारण विनिर्मित उत्पादों, खनिजों, मशीनरी एवं उपकरण, खाद्य उत्पादों के निर्माण और वस्त्रों की कीमतों में वृद्धि रही। विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के 1.33 प्रतिशत के मुकाबले दिसंबर में बढ़कर 1.82 प्रतिशत हो गई, जो औद्योगिक लागत में बढ़ोतरी का संकेत देती है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी
डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नवंबर में यह दर 4.16 प्रतिशत थी। खासतौर पर सब्जियों की महंगाई दर में दिसंबर में 3.50 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि नवंबर में यह 20.23 प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। इससे उपभोक्ताओं को कुछ हद तक राहत मिली।
गैर-खाद्य और ईंधन क्षेत्र में बढ़ता दबाव
गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 2.95 प्रतिशत हो गई, जो नवंबर में 2.27 प्रतिशत थी। वहीं ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई दर दिसंबर में 2.31 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 2.27 प्रतिशत के लगभग समान रही। इन क्षेत्रों में कीमतों का दबाव उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकता है।
खुदरा मुद्रास्फीति भी तीन महीने के उच्च स्तर पर
सब्जी, अंडा, दाल और अन्य रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो तीन महीने का उच्च स्तर है। नवंबर में यह दर 0.71 प्रतिशत थी। इससे पहले सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति 1.44 प्रतिशत के स्तर पर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर नजर रखता है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति और आर्थिक अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में अब तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, जिसके बाद यह 5.5 प्रतिशत पर आ गई है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को पहले के 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया गया है।
मजबूत आर्थिक वृद्धि के संकेत
भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत और अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है और मांग बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में आर्थिक रफ्तार और मजबूत हो सकती है।
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