राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर घटकर 668 फीट तक पहुंच गया है, जो सामान्य स्तर से लगभग 6.5 नॉच नीचे है। यह स्तर वर्ष 2021 में दर्ज 667 फीट के ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर के बेहद करीब माना जा रहा है। लगातार कम हो रहे जल प्रवाह के कारण दिल्ली के जल स्रोतों पर गंभीर दबाव पैदा हो गया है और कई इलाकों में पेयजल संकट गहराने लगा है।
राजधानी के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति प्रभावित
यमुना में पर्याप्त पानी न होने के कारण दिल्ली के सबसे बड़े जल शोधन संयंत्रों—वजीराबाद और चंद्रावल—को कच्चे पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते मध्य, उत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के अनेक इलाकों में पिछले कई दिनों से सीमित जलापूर्ति की जा रही है। कई क्षेत्रों के निवासियों को पानी के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।
वजीराबाद संयंत्र को बचाने के लिए अपनाए गए आपात कदम
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वजीराबाद जल शोधन संयंत्र तक पानी पहुंचाने के लिए कर्मचारियों को नदी तल में हाथों से अस्थायी नहरें खोदनी पड़ रही हैं। सोनिया विहार क्षेत्र के निकट बची हुई पानी की छोटी-छोटी धाराओं को इन नहरों के जरिए संयंत्र तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार जलस्तर संयंत्र के जल ग्रहण बिंदु से भी नीचे चला गया है, जिससे उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ा है।
भारी मशीनों की मदद से बनाया जाएगा नया चैनल
अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की विशेष ड्रेजिंग मशीनों की सहायता से नदी तल में एक बड़ा और गहरा चैनल तैयार किया जाएगा। उम्मीद है कि इससे नदी में उपलब्ध सीमित जल को अधिक प्रभावी ढंग से वजीराबाद संयंत्र तक पहुंचाया जा सकेगा। सोमवार से इस दिशा में व्यापक कार्य शुरू करने की योजना बनाई गई है।
बारिश से नहीं, अतिरिक्त जल छोड़ने से मिलेगी राहत
हालांकि मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से सोमवार और मंगलवार को हल्की बारिश की संभावना जताई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जल संकट का समाधान नहीं होगा। दिल्ली को वास्तविक राहत तभी मिल सकती है जब हरियाणा स्थित हथिनीकुंड बैराज अथवा सोम्ब नहर के माध्यम से यमुना में अतिरिक्त पानी छोड़ा जाए। फिलहाल प्रशासन की निगाहें इन्हीं स्रोतों से संभावित जल प्रवाह पर टिकी हुई हैं।
बढ़ती आबादी और जल प्रबंधन की चुनौती
यमुना का लगातार घटता जलस्तर राजधानी के सामने खड़े दीर्घकालिक जल प्रबंधन संकट को भी उजागर करता है। बढ़ती आबादी, बढ़ती जल मांग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच दिल्ली को भविष्य के लिए अधिक टिकाऊ जल संरक्षण और आपूर्ति रणनीतियों की आवश्यकता महसूस हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आपातकालीन उपायों से नहीं, बल्कि समग्र जल संसाधन प्रबंधन से ही इस तरह के संकटों का स्थायी समाधान संभव है।