कोटा: कहा जाता है कि हर आदमी की सफलता के पीछे औरत का हाथ होता है, लेकिन एक उदाहरण ऐसा भी सामने आ रहा है जिसमें आदमी की सफलता के पीछे औरत का हाथ तो है लेकिन वह औरत का हाथ नेगेटिव रूप में है, एक युवक की पत्नी उसे छोड़कर चली गई। बस फिर क्या था, अपनी पत्नी की बेवफाई कहें या वक्त का तकाजा, एक युवक ने ऐसा प्रयास शुरू किया जो आज कोटा ही नहीं प्रदेश में कई जगह जाना पहचाना जाने लगा है। यह नाम है बेवफा चाय वाले का, बेवफा चाय वाला एक ऐसा नाम हो गया है जो कोटा में हर किसी की जुबां पर है। यहां चाय तो मिलती है लेकिन हर चाय का अपना ही नाम है।
इन नामों की मिलती है चाय
बेवफा चाय के संचालक दीपक परिहार बताते हैं कि कोई टेंशन (Rajasthan) वाली चाय है, तो कोई प्यार वाली चाय है, सिर दर्द वाली चाय है, टेंशन वाली चाय है, सुकून वाली चाय है, दोस्ती वाली चाय है, यार वाली चाय है, तो प्यार वाली चाय है, मोशन वाली चाय है तो दिलखुश वाली चाय है, ऐसे ही कई चाय के नाम है जो यहां पर पिलाई जाती है। इसके साथ ही कॉफी की अगर बात करें तो कहा जाता है कि जब पहला प्यार परवान चढ़ता है तो लोग डेट पर कॉफी पीने जाते हैं। खामखा कॉफी को बदनाम कर देते हैं। इसलिए जब ब्रेकअप होता है तो कॉफी बदनाम होती है। इसलिए कॉफी का नाम भी बदनाम कॉफी रख दिया। बीवी को चाऊमीन पसंद थी और वह छोड़ कर चली गई तो चाउमिन चालू हो गई। इसके साथ ही बकवास मैगी भी यहां मिलती है।
वेटर था इसलिए बीवी छोड़ कर चली गई
बेवफा चाय वाले के दीपक बताते हैं कि उनकी शादी वर्ष 2012 में हुई थी। 6 साल बीवी साथ रही उसके बाद 2019 में लॉकडाउन लग गया। वह वेटर का काम करते थे पैसे कम मिलते थे। दीपक का कहना है कि कभी भी कोई बीवी या माशूका बेवफा नहीं होती। उसका वक्त बेवफा होता है। समय विपरीत होता है तो अपने भी साथ छोड़ देते हैं। ऐसा ही उसके साथ भी हुआ।
कोरोना काल में मध्य प्रदेश में नौकरी गई. नौकरी जाने के बाद बीवी भी चली गई। तभी से लगातार कोर्ट में केस चल रहा है. केस के दौरान फिर से वेटर की नौकरी की। होटल मैनेजर की नौकरी तक पहुंच गया, लेकिन कोर्ट के चक्कर में काम भी चला गया। उसके बाद सोचा अपना काम फिर से शुरू किया जाए, तो कोटा में एक बेवफा चाय वाले की दुकान डाली।
16 लोगों को मिल रहा रोजगार
दीपक ने बताया कि पत्नी से आहत होकर यह दुकान जरूर (Rajasthan) डाली गई, लेकिन इसके पीछे का मकसद है कि लोग नौकरी देखकर आर्थिक परिस्थिति देखकर प्यार ना करें। वह लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि कभी भी कोई व्यक्ति बेवफा नहीं हो सकता। समय आता जाता है, बदलता है। मेरा खराब समय था वह चला गया। अच्छा समय आ गया, जिसमें आज मैंने करीब 16 लोगों को रोजगार दे रखा है। वह सब अपने अपने घर परिवार की जीविका चला रहे हैं। दीपक का कहना है कि अब वह दोबारा उस पत्नी को नहीं लाएंगे क्योंकि चाहे सोने की गांठ हो एक बार लग जाए तो फिर संभव नहीं कि वैसा ही रिश्ता दोबारा बनेगा। वेटर से मालिक तक का सफर तय करने में भले ही उनके पीछे की कहानी में उनकी बीवी का सकारात्मक या नकारात्मक हाथ हो, लेकिन कहीं ना कहीं उसे यह दिखाना जरूर था कि मैं भी बहुत कुछ कर सकता हूं।
10 रुपए से लेकर 250 रुपए तक की चाय
दीपक ने इमोशनल होकर कहा कि यह तो अभी शुरुआत है, मुझे बहुत आगे तक जाना है। उन्होंने चालू चाऊमीन भी शुरू की क्योंकि उनकी पत्नी को चाऊमीन बहुत पसंद थी और वह उनके लिए घर पर चाऊमीन लाया करते थे। इसलिए वह चालू चाऊमीन हो गई। उन्होंने बकवास मैगी भी शुरू कि, लोग पूछते हैं कि इतनी बकवास है। इसका नाम बकवास क्यों, उन्होंने कहा कि मैगी कभी भी 2 मिनट में नहीं बन सकती। इसलिए हम हर चीज प्रैक्टिकल करते हैं और यदि 2 मिनट में मैगी बनेगी तो बकवास ही बनेगी। इसलिए मैगी भी बकवास हो गई। मुझे आज भी उसी से प्रेम है, लेकिन मैं उन्हें अब रखूंगा नहीं मैंने संघर्ष किया और संघर्ष से मुकाम हासिल किया है। हमारे यहां 10 रुपए से लेकर 250 रुपए तक की चाय मिलती हैं।
लगा रहता है कोचिंग स्टूडेंटों को जमावड़ा
जब चाय की दुकान शुरूआत में खोली तो कई स्लोगन (Rajasthan) लिखे गए। वह स्लोगन युवाओं को छू गए और चाय की दुकान हंसी का पात्र बन गई, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने दिल का दर्द समझे, जुदाई का दर्द समझा और आज वही चाय की दुकान लोगों के लिए एक चर्चा का विषय बन गई है। यहां पर चाय वाले की चर्चा तो होती ही है। अपने-अपने प्यार मोहब्बत की बातें भी होती है। दीपक का लाखों का टर्नओवर है। यह केवल दुकान ही नहीं है यहां का जायका भी अपने आप में मशहूर है। यहां सुबह शाम स्टूडेंट्स का जमावड़ा लगा रहता है। कोटा के जवाहर नगर में चलने वाली बेवफा चाय वाले की दुकान के नीचे लिखा है टूटे हुए दिलों का अस्पताल। लोगों को कोविड ने बहुत कुछ सिखाया और आज कई लोग सोशल मीडिया से ही अपनी दुकान चला रहे हैं।