कोलकाता डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है। धार्मिक दृष्टि से इस दिन व्रत, पूजा, दान और अनंत सूत्र धारण करने का विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की होती है पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के दौरान उनके अनंत स्वरूप का ध्यान किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने और श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
14 गांठ वाले अनंत सूत्र की परंपरा
इस पर्व की सबसे खास परंपराओं में अनंत सूत्र धारण करना शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं, जो भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप से जुड़ी मानी जाती हैं। पूजा के बाद पुरुष इसे दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में धारण करती हैं। इसे भगवान विष्णु के प्रति आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
दान-पुण्य का भी है महत्व
अनंत चतुर्दशी पर जरूरतमंदों की मदद और दान करने की परंपरा भी रही है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, फल और पीली वस्तुओं का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया दान पुण्यदायी होता है और इसका सकारात्मक प्रभाव जीवन पर पड़ता है।
शाम के समय जलाएं घी का दीपक
इस दिन शाम को भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाकर पूजा करने की भी मान्यता है। दीपक जलाने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान और मंत्र जाप किया जा सकता है। मान्यता है कि इससे घर के वातावरण में सकारात्मकता आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
माता लक्ष्मी को कौड़ियां करें अर्पित
धन-संपत्ति और आर्थिक समृद्धि की कामना रखने वाले लोग अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दौरान 5 या 7 कौड़ियां माता लक्ष्मी को अर्पित की जाती हैं। पूजा पूरी होने के बाद इन कौड़ियों को लाल या पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा है।
तुलसी पूजा से जुड़ी है विशेष मान्यता
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान माना गया है। ऐसे में अनंत चतुर्दशी पर तुलसी के पौधे की पूजा भी की जा सकती है। तुलसी को जल अर्पित करने के बाद उसके पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु का स्मरण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी पूजा भगवान विष्णु की आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
गणेश विसर्जन के साथ पर्व का विशेष संयोग
अनंत चतुर्दशी का संबंध भगवान गणेश से भी है। 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन इसी दिन होता है। श्रद्धालु गणपति की पूजा-अर्चना के बाद उन्हें विदाई देते हैं और परंपरा के अनुसार गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। यही वजह है कि इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में भगवान विष्णु की पूजा के साथ गणेश विसर्जन के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।