भोपाल डेस्क. त्योहार दिवाली का हो या कोई और वह केवल घर की सफाई और सजावट का उत्सव नहीं होता। यह जिंदगी को नए सिरे से संवारने का वक्त भी होता है। जिस तरह हम घर के कोने-कोने को साफ करते हैं नया पेंट करवाते हैं और बेकार चीजों को बाहर निकालते हैं उसी तरह दिलो-दिमाग की भी रेनोवेशन करनी चाहिए। बाहरी धूल झाड़ते समय जीवन के कई अनछुए कोने रह जाते हैं जिन्हें नवीनीकरण की सख्त जरूरत होती है। इस बार घर के भीतर दीये जलाने के साथ जीवन के अन्य पहलुओं में भी उजियारा फैलाने का संकल्प लें। सकारात्मकता अपनाएं और कड़वाहट त्याग दें। त्योहार बाहरी चमक से आगे बढ़कर आंतरिक परिवर्तन का माध्यम बने।
अपनी पहचान को फिर से चमकाएं
घर और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते अक्सर महिलाएं अपनी खुद की पहचान इच्छाओं और वजूद को पीछे छोड़ देती हैं। आप किसी की मां पत्नी या बहू होने से पहले एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं। इस बार अपने इस स्वयं के ऊपर जमी धूल को साफ करें। जैसे अलमारी में रखी साड़ी को धूप दिखाते हैं वैसे ही भीतर की उस स्त्री को बाहर निकालिए जो कभी बेबाकी से हंसती थी। जिसे खुद के लिए समय निकालना पसंद था। अपनी पहचान को फिर से चमकाने का यह अवसर न गंवाएं। छोटे-छोटे व्यक्तिगत पल निकालकर आत्मविश्वास को मजबूत करें। स्वयं को प्राथमिकता देना स्वार्थ नहीं बल्कि संतुलन है।
दबी हुई रुचियों को जगाएं
पहले आपके भी कुछ शौक रहे होंगे जैसे पेंटिंग करना डायरी लिखना सितार बजाना या बागवानी। याद कीजिए कि कैसे कॉलेज की प्रदर्शनियों के लिए खूबसूरत कैनवास तैयार किए जाते थे। इस दिवाली अपने हाथों से कुछ पेंट करें या कोई पुरानी कलाकृति दोबारा बनाएं। जब हाथों की बनाई चीज लिविंग रूम में सजगी तो वह न केवल घर को बल्कि भीतर के कलाकार को भी उजास से भर देगी। दबी हुई रुचियों को समय देना मानसिक ताजगी लाता है। रोजमर्रा की भागदौड़ से अलग हटकर रचनात्मकता को जगह दें। शौक पूरे जीवन को रंगीन और संतुलित बनाते हैं।
विचारों और कड़वाहट की सफाई
मस्तिष्क में पुरानी चिंताओं पूर्वाग्रहों और नकारात्मक विचारों का कबाड़ जमा होता रहता है। किसी की कही बात दिल में रह जाती है या विफलता का डर कोने में छिपा रहता है। इस बार नकारात्मक विचारों और ओवर थिंकिंग की आदत को झाड़कर बाहर कर दीजिए। पुराने मतभेद शिकायतें ईर्ष्या और मनमुटाव दिल में बैठ जाते हैं। नफरत का यह बोझ नुकसान पहुंचाता है। दिवाली के पावन दिनों में क्षमा और सद्भावना का दीया जलाएं। जिसने दिल दुखाया उसे माफ करें और अपनी भूल हो तो बेझिझक माफी मांग लें। मन को हल्का करने से जीवन सहज हो जाता है।
रिश्तों और डिजिटल जीवन की व्यवस्था
भागदौड़ भरी जिंदगी में कई रिश्ते पीछे छूट जाते हैं। काम के दबाव में अपनों को समय नहीं दे पाते। इस दिवाली उन रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों को फोन करें जिनसे महीनों से बात नहीं हुई। परिवार के साथ बिना फोन या स्क्रीन के बैठकर बातें करें। रिश्तों की जगमगाहट से बढ़कर कोई रोशनी नहीं होती। डिजिटल जीवन में हजारों फालतू तस्वीरें गैर-जरूरी ऐप्स और नकारात्मक अकाउंट्स भरे पड़े हैं। फोन से अनावश्यक फाइलें हटाएं और तुलना पैदा करने वाले हैंडल अनफॉलो करें। डिजिटल डिक्लटरिंग मानसिक शांति लाती है।
वाणी पर्यावरण और सेवा का दीपक
त्योहारों पर मिठाइयों से मुंह मीठा करवाने के साथ व्यवहार से मन में भी मिठास घोलें। भाषा में कटुता अधीरता या व्यंग्य से बचें और शब्दों में मिठास तथा सम्मान लाएं। घर साफ करते समय कचरा बाहर फेंकने या पटाखों प्लास्टिक के अतिरेक से पर्यावरण को दूषित न करें। मिट्टी के दीये प्राकृतिक फूल और हस्तशिल्प अपनाएं। सच्चा उजास असहाय के जीवन में खुशी की लौ जलाने से आता है। समृद्धि का छोटा हिस्सा जरूरतमंदों से साझा करें। दिवाली केवल तारीख नहीं बल्कि पुरानी बुराइयों को त्यागकर नया दृष्टिकोण अपनाने का उत्सव है।