नई दिल्ली - भारतीय क्रिकेट टीम में खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अब पहले से ज्यादा सख्ती बरतने की तैयारी में है। लगातार चोटिल होने और अहम सीरीज से पहले खिलाड़ियों के बाहर होने के मामलों ने बोर्ड, चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अब खिलाड़ियों की उपलब्धता घोषित करने से पहले उनकी फिटनेस को लेकर ज्यादा पुख्ता जांच पर जोर दिया जा रहा है।

100 नहीं, 200 प्रतिशत भरोसा चाहता है बोर्ड
क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, BCCI अब किसी खिलाड़ी को सीरीज के लिए उपलब्ध घोषित करने से पहले उसकी फिटनेस को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहता है। बोर्ड की कोशिश है कि किसी खिलाड़ी की फिटनेस को लेकर सिर्फ 100 प्रतिशत नहीं, बल्कि 200 प्रतिशत तक भरोसा हो, ताकि सीरीज शुरू होने के बाद अचानक चोट के कारण टीम का संतुलन प्रभावित न हो। हाल के समय में कई खिलाड़ियों के चोटिल होने के कारण आखिरी वक्त पर टीम में बदलाव करने पड़े हैं। इसी वजह से फिटनेस को लेकर नई और सख्त व्यवस्था पर चर्चा तेज हुई है।

कई खिलाड़ियों की जगह करना पड़ा बदलाव
पिछले कुछ दौरों में भारतीय टीम को खिलाड़ियों की चोट के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जसप्रीत बुमराह, साई सुदर्शन, नितीश कुमार रेड्डी और वरुण चक्रवर्ती जैसे खिलाड़ियों से जुड़े मामलों में टीम संयोजन प्रभावित हुआ और कुछ मौकों पर उनकी जगह दूसरे खिलाड़ियों को शामिल करना पड़ा। इन घटनाओं के बाद चयन प्रक्रिया में फिटनेस को और अधिक महत्व दिए जाने की संभावना बढ़ गई है। अब कुछ खिलाड़ियों का चयन ही फिटनेस टेस्ट पास करने की शर्त के साथ किया जा रहा है।
अफगानिस्तान सीरीज के लिए भी फिटनेस शर्त
अफगानिस्तान के खिलाफ घोषित T20I सीरीज की टीम में भी कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के नाम के साथ फिटनेस से जुड़ी शर्त रखी गई है। इनमें जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा शामिल हैं। इसका मतलब साफ है कि टीम में नाम शामिल होना ही अंतिम पुष्टि नहीं माना जा रहा। संबंधित खिलाड़ियों को फिटनेस से जुड़े मानकों पर खरा उतरना होगा, जिसके बाद ही उनकी उपलब्धता को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
चोटों से टीम मैनेजमेंट की बढ़ी चिंता
क्रिकेट के लगातार बढ़ते शेड्यूल और तीनों फॉर्मेट में खिलाड़ियों पर पड़ने वाले दबाव के बीच चोटों का प्रबंधन BCCI के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। किसी प्रमुख खिलाड़ी के अचानक बाहर होने से न सिर्फ टीम संयोजन प्रभावित होता है, बल्कि उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को कम समय में तैयार करना भी मुश्किल होता है। नई व्यवस्था के जरिए बोर्ड इसी समस्या को कम करना चाहता है। आने वाले समय में खिलाड़ियों की फिटनेस निगरानी, टेस्ट और मेडिकल आकलन को चयन प्रक्रिया का और महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।
फिटनेस अब चयन प्रक्रिया का अहम आधार
BCCI के इस सख्त रुख से संकेत मिलता है कि अब सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन ही टीम में जगह बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। खिलाड़ियों की फिटनेस और लंबे समय तक उपलब्ध रहने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। इससे भारतीय टीम को अहम सीरीज के दौरान अचानक होने वाले बदलावों से बचाने और मजबूत टीम संयोजन बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।