स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शुक्रवार का दिन भारत के लिए बेहद यादगार साबित हुआ, जब महज 15 मिनट के अंतराल में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। पहले महिला जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया और कुछ ही देर बाद हर्ष सिंह ने पुरुष वर्ग में गोल्ड जीतकर भारत की झोली में दूसरा स्वर्ण डाल दिया। इन दोनों जीत के साथ भारत की कुल पदक संख्या बढ़कर 19 हो गई है और भारतीय दल ने पदक तालिका में अपनी स्थिति भी मजबूत कर ली है।
अस्मिता डे ने रोमांचक मुकाबले में जीता गोल्ड
भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में कनाडा की मजबूत खिलाड़ी हेइडी क्वाच का सामना किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन अस्मिता ने शानदार तकनीक, आत्मविश्वास और संयम का परिचय देते हुए मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया। यह जीत भारत के लिए दिन का पहला स्वर्ण पदक साबित हुई। अस्मिता की इस उपलब्धि ने भारतीय दल का मनोबल बढ़ा दिया और पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई।
15 मिनट बाद हर्ष सिंह ने दिलाया दूसरा गोल्ड
अस्मिता की जीत के लगभग 15 मिनट बाद भारत को दूसरा स्वर्ण पदक भी मिल गया। पुरुषों की 60 किलोग्राम भार वर्ग की जूडो स्पर्धा के फाइनल में भारतीय खिलाड़ी हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज के खिलाफ पूरी तरह एकतरफा प्रदर्शन किया।
हर्ष ने मुकाबले में शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई और अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबला 10-0 से जीत लिया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया। उनकी इस प्रभावशाली जीत ने भारत के लिए दिन को और भी खास बना दिया।
पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत
दो नए स्वर्ण पदक जुड़ने के बाद भारत के खाते में अब कुल 19 पदक हो गए हैं। इनमें 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारत फिलहाल कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पदक तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है।भारतीय खिलाड़ी विभिन्न खेलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
जूडो में भारत का दमदार प्रदर्शन
इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने अपनी क्षमता का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह की स्वर्णिम सफलता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय जूडो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत चुनौती पेश करने की स्थिति में पहुंच चुका है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी इसी लय को बरकरार रखते हैं तो आने वाले दिनों में देश के खाते में कई और पदक जुड़ सकते हैं।