अंतरिक्ष की विशाल दुनिया में वैज्ञानिकों ने ऐसा तारा खोज निकाला है जिसकी गति पृथ्वी पर हमारी कल्पना से भी परे है। S301 नाम का यह तारा अपनी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद महाविशाल ब्लैक होल Sagittarius A* की परिक्रमा करता है और अपनी कक्षा के सबसे नजदीकी बिंदु पर करीब 25,000 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति तक पहुंच जाता है। यह गति प्रकाश की गति की लगभग 8 प्रतिशत है और एक सामान्य यात्री विमान की गति से करीब 100,000 गुना अधिक है। इस असाधारण वेग ने S301 को अब तक ज्ञात सबसे तेज तारा बना दिया है। वैज्ञानिकों के लिए इसकी खासियत केवल इसकी गति नहीं, बल्कि ब्लैक होल के साथ इसकी बेहद करीबी और लंबी अवधि वाली कक्षा भी है।
Sagittarius A* के बेहद करीब करता है परिक्रमा
S301 जिस ब्लैक होल के आसपास घूम रहा है, उसे Sagittarius A* कहा जाता है और यह हमारी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित है। इस महाविशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से करीब 4.3 मिलियन गुना अधिक है और यह पृथ्वी से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर है। S301 की कक्षा इतनी सघन और अत्यधिक अंडाकार है कि वह ब्लैक होल के बेहद करीब पहुंच जाता है। अपने निकटतम बिंदु पर इसकी दूरी लगभग 12 खगोलीय इकाई है, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी की करीब 12 गुना है और लगभग शनि तथा सूर्य के बीच की दूरी के बराबर मानी जा सकती है। अभी तक देखे गए किसी अन्य तारे ने Sagittarius A* के इतने करीब जाकर इतनी तीव्र गति से परिक्रमा नहीं की है।
केवल 8.7 साल में पूरा करता है एक चक्कर
S301 की कक्षा की एक और हैरान करने वाली विशेषता उसका छोटा परिक्रमा काल है। यह तारा Sagittarius A* की एक पूरी परिक्रमा केवल 8.7 साल में पूरी करता है। इसकी कक्षा अत्यधिक अंडाकार है, जिसका अर्थ है कि ब्लैक होल से दूर रहने के दौरान इसकी गति अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन जैसे-जैसे यह ब्लैक होल के करीब पहुंचता है, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से इसकी गति तेजी से बढ़ती जाती है। निकटतम बिंदु पर पहुंचने के दौरान ही यह लगभग 25,000 किलोमीटर प्रति सेकंड का चरम वेग हासिल करता है और फिर ब्लैक होल के चारों ओर घूमकर दोबारा दूर जाने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह असाधारण कक्षा ही S301 को ब्लैक होल के गहरे रहस्यों को समझने के लिए इतना उपयोगी बनाती है।
वैज्ञानिकों को कैसे मिला यह असाधारण तारा
S301 कोई ऐसा तारा नहीं है जिसे साधारण दूरबीन से आसानी से देखा जा सके। यह बहुत धुंधला मुख्य-अनुक्रम तारा है और इसकी पहचान के लिए अत्याधुनिक अवरक्त खगोलीय तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला की वेरी लार्ज टेलीस्कोप इंटरफेरोमीटर और उससे जुड़े अत्यधिक संवेदनशील उपकरणों के माध्यम से तारों की गति और स्थिति का लंबे समय तक अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पुराने आंकड़ों को भी नए अवलोकनों के साथ मिलाकर S301 की कक्षा का निर्धारण किया। इस विस्तृत अध्ययन से वैज्ञानिकों को पता चला कि तारा एक बेहद अंडाकार और तंग कक्षा में घूम रहा है और उसके वेग में ब्लैक होल के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।
ब्लैक होल के घूमने का मिलेगा सीधा सुराग
S301 की सबसे बड़ी वैज्ञानिक अहमियत इस बात में है कि यह वैज्ञानिकों को Sagittarius A* के घूर्णन यानी स्पिन को मापने का संभावित अवसर देता है। सामान्य सापेक्षता के अनुसार घूमता हुआ ब्लैक होल अपने आसपास मौजूद समय और अंतरिक्ष को भी प्रभावित करता है। इसे फ्रेम-ड्रैगिंग प्रभाव के रूप में समझा जाता है, जिसमें घूमते हुए अत्यंत विशाल पिंड के कारण आसपास के अंतरिक्ष-समय की संरचना में खिंचाव पैदा होता है। यदि किसी तारे की कक्षा इतनी नजदीक हो और उसकी गति इतनी अधिक हो कि इस प्रभाव को मापा जा सके, तो उसके मार्ग में होने वाले सूक्ष्म बदलाव ब्लैक होल के स्पिन के बारे में जानकारी दे सकते हैं। S301 में वैज्ञानिकों को पहली बार इस दिशा में असाधारण रूप से अनुकूल परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं।
आइंस्टीन के सिद्धांत की भी हो सकती है अहम परीक्षा
S301 का अध्ययन केवल एक तेज तारे की खोज तक सीमित नहीं है। इसकी कक्षा वैज्ञानिकों को आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत की उन भविष्यवाणियों की जांच करने का अवसर दे सकती है, जो अत्यंत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में लागू होती हैं। पहले Sagittarius A* के आसपास मौजूद तारों की गति से गुरुत्वीय लाल विचलन, अनुप्रस्थ डॉप्लर प्रभाव और श्वार्जशिल्ड प्रकार के कक्षीय बदलावों जैसे सापेक्षतावादी प्रभावों का अध्ययन किया जा चुका है। S301 की अधिक तेज और नजदीकी कक्षा इससे आगे जाकर घूमते हुए ब्लैक होल से जुड़े केर प्रभावों की जांच का रास्ता खोलती है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे मजबूत गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में सामान्य सापेक्षता की एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला के रूप में देख रहे हैं।
क्या S301 ब्लैक होल में समा जाएगा?
S301 का Sagittarius A* के बेहद करीब जाना सुनने में भले ही विनाशकारी लगे, लेकिन वैज्ञानिकों के मौजूदा आकलन के अनुसार इसके ब्लैक होल के घटना क्षितिज में समा जाने की स्थिति नहीं है। तारा अपनी निर्धारित कक्षा में ब्लैक होल के करीब आता है और फिर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से मुड़ते हुए दूर चला जाता है। इसकी दूरी इतनी है कि फिलहाल इसे ब्लैक होल द्वारा निगल लिए जाने का खतरा नहीं माना जा रहा। बल्कि यही सुरक्षित लेकिन अत्यधिक नजदीकी कक्षा वैज्ञानिकों के लिए वरदान है, क्योंकि इससे वे तारे की गति में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों को लगातार माप सकते हैं और उन बदलावों के आधार पर ब्लैक होल के गुणों का अनुमान लगा सकते हैं।
कहीं यह किसी टूटे हुए तारकीय जोड़े का हिस्सा तो नहीं?
S301 की अत्यधिक अंडाकार कक्षा ने वैज्ञानिकों के सामने उसके जन्म और वर्तमान स्थिति से जुड़ा एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा किया है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह तारा संभवतः कभी किसी द्वितारा प्रणाली का हिस्सा रहा होगा। ब्लैक होल के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण ने उस तारकीय जोड़े को तोड़ दिया होगा और उनमें से एक तारा Sagittarius A* के आसपास की कक्षा में फंस गया, जबकि दूसरा तारा अत्यधिक वेग के साथ बाहर की ओर निकल गया होगा। इस प्रक्रिया को ‘हिल्स तंत्र’ कहा जाता है। S301 की अत्यधिक अंडाकार कक्षा इस परिकल्पना के अनुरूप दिखाई देती है। यदि आगे के अवलोकन इस संभावना की पुष्टि करते हैं, तो यह खोज केवल ब्लैक होल के अध्ययन में ही नहीं, बल्कि आकाशगंगा के केंद्र में तारों की उत्पत्ति और उनकी गतिशीलता को समझने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
अगले कुछ वर्षों में खुल सकते हैं ब्लैक होल के बड़े रहस्य
S301 का अध्ययन अभी समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि इसकी असली वैज्ञानिक उपयोगिता आने वाले वर्षों में और स्पष्ट हो सकती है। वैज्ञानिक इसकी कक्षा को लगातार मापकर यह देखने की कोशिश करेंगे कि ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण और संभावित घूर्णन के कारण इसके मार्ग में कितने सूक्ष्म परिवर्तन आते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा अवरक्त इंटरफेरोमेट्री और भविष्य की अत्यधिक शक्तिशाली दूरबीनों से किए जाने वाले अवलोकन इस तारे की गति को और सटीकता से दर्ज कर सकेंगे। यदि इन मापों से Sagittarius A* के स्पिन का विश्वसनीय निर्धारण हो जाता है, तो यह किसी शांत महाविशाल ब्लैक होल के घूर्णन का प्रत्यक्ष मापन करने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। S301 इस तरह केवल आकाशगंगा का सबसे तेज ज्ञात तारा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय पिंडों में से एक को समझने की नई खिड़की भी बन सकता है।