रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हालिया चुनावी हार के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए पार्टी ने बड़े पैमाने पर रणनीति तैयार की है, जिसका असर सीधे बूथ स्तर तक दिखाने का दावा किया जा रहा है।
मिशन 2028: संगठन के दम पर वापसी की तैयारी
2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने “संगठन महाअभियान” शुरू किया है। इस अभियान के तहत प्रदेशभर में करीब 27 हजार बूथ समितियों और 15 हजार पंचायत कमेटियों के गठन की योजना बनाई गई है। पार्टी का लक्ष्य गांव से लेकर शहर तक हर मतदाता तक अपनी पहुंच मजबूत करना है।
डेडलाइन तय, जिम्मेदारियां स्पष्ट
41 जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब संगठन का फोकस कार्यकारिणी गठन पर है। इसके लिए 31 मार्च की सख्त समय-सीमा तय की गई है। जिला से लेकर ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सक्रिय कार्यकर्ताओं को फ्रंटलाइन में लाने की कोशिश की जा रही है।
एकजुटता की चुनौती
कांग्रेस इस अभियान के जरिए न केवल संगठन विस्तार, बल्कि आंतरिक गुटबाजी को खत्म करने की भी कोशिश कर रही है। पुराने मतभेद भुलाकर एकजुटता का संदेश देने की रणनीति बनाई गई है, ताकि 2028 के चुनावी मुकाबले में मजबूती के साथ उतर सके।
बीजेपी का पलटवार
वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के इस अभियान पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के पास न मजबूत नेतृत्व है, न ही कोई ठोस मुद्दा। बीजेपी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस का संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर है और यह अभियान केवल दिखावा भर है।
क्या बदलेगी सियासी तस्वीर?
कांग्रेस का दावा है कि राज्य सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है, जिसे संगठित कर वह चुनावी समीकरण बदल सकती है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या संगठनात्मक बदलाव और तय समय-सीमा के भीतर की गई कवायद पार्टी की आंतरिक कमजोरियों को दूर कर पाएगी?
फिलहाल, यह साफ है कि 2028 की लड़ाई को लेकर कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है। लेकिन बिखरे हुए संगठन को समेटकर खोया हुआ जनाधार और सियासी रुतबा वापस पाना—यही सबसे बड़ी चुनौती होगी।