लखनऊ - अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों की बजाय एसआईटी (SIT) को सौंपना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पर सत्ता के अंदरूनी समीकरणों का असर दिखाई दे रहा है।
'ED-CBI नहीं, SIT क्यों?'
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि अगर मामले की जांच ईडी, सीबीआई या आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाती, तो जांच की दिशा अलग होती। उन्होंने दावा किया कि जांच एसआईटी को सौंपे जाने के पीछे सत्ता के भीतर "दिल्ली और लखनऊ" के बीच राजनीतिक खींचतान है।
उन्होंने कहा कि,
"अगर ईडी, सीबीआई या इनकम टैक्स जांच करते तो नियंत्रण किसके पास होता? लखनऊ ने पहले ही सब अपने हाथ में ले लिया। आखिर एसआईटी किसे रिपोर्ट दे रही है?"
'मर्यादा की सीमाएं लांघ दी गईं'
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि दान और चढ़ावे की राशि गलत हाथों में पहुंच गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भगवान राम के जीवन से 'मर्यादा' का संदेश मिलता है, लेकिन इस मामले में मर्यादा की सभी सीमाएं पार कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि पैसे के लालच में लोगों ने अपनी सीमाएं भूल गईं और जनता के आक्रोश से बचने की कोशिश की जा रही है।
BJP का पलटवार
अखिलेश के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर दान चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन विपक्ष इस संवेदनशील मामले पर राजनीति कर रहा है। ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने वर्षों तक राम मंदिर का विरोध किया और अब आस्था से जुड़े विषय पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं।
जांच जारी
राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच फिलहाल विशेष जांच दल (SIT) कर रही है। इस मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।