लखनऊ।उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए विवाद के बाद पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है। सपा ने गोरखपुर की जिला और महानगर इकाई के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस कार्रवाई के दायरे में जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष समेत संबंधित पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई 3 अक्टूबर 2026 को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में हुई उस घटना के बाद की गई, जिसमें प्रेस वार्ता के दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया था। मामला गाली-गलौज और हाथापाई तक पहुंच गया था।
बैठने की व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद
शनिवार, 3 अक्टूबर को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में समाजवादी पार्टी की प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। इसी दौरान बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ गई और गाली-गलौज के बाद हाथापाई की स्थिति बन गई।आरोप है कि गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से टिकट के दावेदार अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह ने पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी को थप्पड़ मार दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया था।
विवाद के बाद सपा नेतृत्व ने गोरखपुर संगठन पर कार्रवाई की। जारी निर्देश के अनुसार जिला अध्यक्ष सहित जिला कार्यकारिणी और महानगर अध्यक्ष सहित महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया।इसके अलावा फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, पदाधिकारी और सदस्यों को भी उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला किया गया।
प्रदेश स्तर की गोरखपुर से जुड़ी इकाइयों पर भी कार्रवाई
सपा की कार्रवाई केवल जिला और महानगर संगठन तक सीमित नहीं रही। पार्टी के आदेश में गोरखपुर से जुड़ी सपा की राज्य कार्यकारिणी और सभी फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से भंग किए जाने की बात कही गई है।इस तरह प्रेस क्लब में हुए विवाद के बाद पार्टी ने संगठन के कई स्तरों पर कार्रवाई की है।
घटना के बाद अंशुमान सिंह के खिलाफ भी पार्टी से निष्कासन की रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि, पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं।नगीना साहनी की ओर से मारपीट और धमकी के आरोप लगाए गए हैं, जबकि अंशुमान सिंह ने पूरे घटनाक्रम को अपनी छवि खराब करने की कोशिश बताया है। इसलिए विवाद से जुड़े इन दावों को संबंधित पक्षों के आरोप और पक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
अब नए संगठन के गठन पर नजर
गोरखपुर में जिला, महानगर और फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां भंग किए जाने के बाद अब पार्टी के नए संगठनात्मक ढांचे पर नजर रहेगी। इस कार्रवाई के बाद सपा नेतृत्व की ओर से गोरखपुर में नए पदाधिकारियों और कार्यकारिणियों के गठन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।