उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर देश के सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। प्रत्येक वर्ष करोड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बढ़ती भीड़, संकरी गलियां और लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा अक्सर कठिन और समय लेने वाली बन जाती है। इसी चुनौती का स्थायी समाधान खोजने के उद्देश्य से यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की महत्वाकांक्षी ‘मथुरा हेरिटेज सिटी’ परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। लगभग 6,922 करोड़ रुपये की इस परियोजना की निविदा को स्वीकृति मिल चुकी है और अब राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
15.3 किलोमीटर नई सड़क से जाम से मिलेगी बड़ी राहत
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण भाग राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) को यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली 15.3 किलोमीटर लंबी नई सड़क का निर्माण है। यह मार्ग आगे यमुना नदी पर प्रस्तावित सस्पेंशन ब्रिज से जुड़ेगा, जिससे दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, आगरा तथा यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से आने वाले श्रद्धालु बिना शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों में प्रवेश किए सीधे मंदिर क्षेत्र के निकट पहुंच सकेंगे। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि मथुरा और वृंदावन के प्रमुख मार्गों पर वर्षों से बनी रहने वाली यातायात समस्या में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगा।
मंदिर क्षेत्र रहेगा वाहन मुक्त, ई-परिवहन बनेगा नई व्यवस्था का आधार
परियोजना के तहत बांके बिहारी मंदिर के आसपास निजी वाहनों के प्रवेश को सीमित करने की योजना बनाई गई है। श्रद्धालुओं को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर अपने वाहन खड़े करने होंगे, जहां से उन्हें ई-रिक्शा और ई-बस जैसी पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के माध्यम से मंदिर तक पहुंचाया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर परिसर में भीड़ और वाहनों के दबाव को कम करना, पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना तथा धार्मिक वातावरण को अधिक व्यवस्थित बनाना है। प्रशासन का मानना है कि इससे स्थानीय निवासियों को भी दैनिक जीवन में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
753 एकड़ में विकसित होगा विश्वस्तरीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिसर
‘मथुरा हेरिटेज सिटी’ परियोजना के अंतर्गत लगभग 753 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त धार्मिक और सांस्कृतिक परिसर विकसित किया जाएगा। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ध्यान केंद्र, प्रवचन स्थल, धर्मशालाएं, होटल, पर्यटन सुविधा केंद्र, संग्रहालय, रेस्टोरेंट, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक गतिविधियों और आध्यात्मिक आयोजनों के लिए भी विशेष स्थान विकसित किए जाएंगे। परियोजना का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचना का विस्तार करना नहीं, बल्कि मथुरा-वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त बनाना है।
6,922 करोड़ रुपये के निवेश से मिलेगा दीर्घकालिक विकास का आधार
पूरी परियोजना पर लगभग 6,922 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इसमें निर्माण कार्यों के लिए लगभग 1,954 करोड़ रुपये तथा भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग 1,310 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। परियोजना के तहत सड़क, पार्किंग और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए लगभग 22 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। योजना के अनुसार चयनित डेवलपर को पांच वर्ष का मोरेटोरियम और 70 वर्ष का संचालन लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। यमुना प्राधिकरण का अनुमान है कि इस परियोजना से भविष्य में प्रतिवर्ष लगभग 34 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है, जिससे क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई वैश्विक पहचान
यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भाटिया के अनुसार निविदा स्वीकृत होने के बाद अब परियोजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही डेवलपर का चयन, भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल बांके बिहारी मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संपूर्ण मथुरा-वृंदावन क्षेत्र को आधुनिक आधारभूत संरचना, सुव्यवस्थित यातायात और विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर भारत के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।