अयोध्या. अयोध्या के प्रमोदवन मोहल्ले में बसी बाबू लाल टेलर्स की दुकान आम सिलाई की दुकान नहीं बल्कि ठाकुर जी की सेवा का जीवंत केंद्र बन चुकी है। इसके प्रोपराइटर शंकर लाल बताते हैं कि उनका पूरा परिवार पिछले कई दशकों से रामलला की पोशाक तैयार करने में लगा हुआ है। जब रामलला टेंट में विराजमान थे तभी से यह सेवा शुरू हुई थी। उस समय सिलाई का काम बहुत कम मिलता था लेकिन सेवा भाव में कभी कोई कमी नहीं आई। दुकान पर रेशमी और मखमली वस्त्रों के साथ संतों के लिए चौबंदी भी तैयार की जाती है। शंकर लाल का कहना है कि यहां सिर्फ कपड़ा नहीं सिलता बल्कि भक्ति और समर्पण की परंपरा भी जीवित रहती है। यह परिवार ठाकुर जी की सेवा को ही अपना जीवन उद्देश्य मानता है।
1985 से शुरू हुई सिलाई सेवा की गाथा
शंकर लाल के अनुसार रामलला की पोशाक सिलने की सेवा 1985 में शुरू हुई थी। उस समय लालदास जी मुख्य पुजारी थे। उन्हीं के माध्यम से शंकर लाल के पिता बाबू लाल, बड़े भाई भगत साहब पहाड़ी और स्वयं शंकर लाल एक बड़ी तथा एक छोटी सिलाई मशीन लेकर विवादित ढांचे के गुंबद के नीचे बैठकर सिलाई करने लगे। नाप लेकर पोशाक तैयार करने का यह काम बड़े ही श्रद्धा भाव से किया जाता था। ढांचा गिरने से पहले तक वे वहीं बैठकर सिलाई करते रहे। इसके बाद भी सेवा नहीं रुकी और घर की दुकान से पोशाक सिलकर पुजारी को सौंपते रहे। यह निरंतरता ही इस परिवार की सबसे बड़ी पहचान बन गई है।
विवादित ढांचे के दिनों की कठिन लेकिन पवित्र यात्रा
विवादित ढांचे की मौजूदगी के समय गुंबद के नीचे सिलाई मशीन लगाकर काम करना आसान नहीं था। फिर भी शंकर लाल का परिवार बिना किसी लालसा के यह सेवा निभाता रहा। उन्होंने कभी इसे व्यापार के रूप में नहीं देखा बल्कि ठाकुर जी की सेवा का अवसर माना। उस कालखंड में उपलब्ध संसाधन सीमित थे लेकिन समर्पण असीमित था। शंकर लाल याद करते हैं कि कैसे वे नाप लेकर पोशाक तैयार करते और श्रद्धापूर्वक सौंप देते थे। यह अनुभव उनके जीवन का सबसे मूल्यवान अध्याय बन चुका है। आज भी वे उन दिनों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं जब सेवा ही उनका एकमात्र लक्ष्य था।
भूमि पूजन के अवसर पर विशेष पोशाक का सम्मान
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में भूमि पूजन के लिए पहुंचे थे तब रामलला ने जो पोशाक धारण की थी वह भी बाबू लाल टेलर्स से ही गई थी। उस समय एक हरे रंग की और एक भगवा रंग की पोशाक तैयार की गई थी। हरे वस्त्र में हीरा, पन्ना और पुखराज जड़कर उसे बेहद भव्य बनाया गया था। ठाकुर जी ने पहले हरा और फिर भगवा वस्त्र धारण किया था। यह क्षण शंकर लाल और उनके परिवार के लिए गौरव का विषय बन गया। उन्होंने इसे ठाकुर जी की विशेष कृपा माना और सेवा को और अधिक समर्पित भाव से निभाते रहे।
दीपोत्सव और बड़े उत्सवों की पोशाक यहीं बनती है
2017 में योगी सरकार आने के बाद शुरू हुए दीपोत्सव से लेकर अब तक हर बड़े उत्सव की पोशाक बाबू लाल टेलर्स में ही तैयार होती है। शंकर लाल बताते हैं कि ठाकुर जी गर्मियों में रेशम और सर्दियों में मखमल के वस्त्र धारण करते हैं। इस बार दीपोत्सव के लिए तीन पोशाकें पहले ही भेज दी गई हैं। उनमें से एक पीला वस्त्र विशेष रूप से तैयार किया गया है जिसे ठाकुर जी दीपोत्सव के दिन धारण करेंगे। यह पीला वस्त्र मंदिर पहुंच चुका है। हर उत्सव की तैयारी में परिवार की मेहनत और श्रद्धा साफ झलकती है।
रेशम मखमल और सेवा भाव की निरंतरता
शंकर लाल का परिवार ठाकुर जी के लिए मौसम के अनुसार वस्त्र चुनता है और बड़ी बारीकी से तैयार करता है। रेशमी वस्त्र गर्मी में और मखमली वस्त्र सर्दी में पहनाए जाते हैं। इस बार दीपोत्सव के लिए चुना गया पीला रंग विशेष महत्व रखता है। शंकर लाल कहते हैं कि उनकी दुकान अब सिर्फ सिलाई का स्थान नहीं बल्कि भक्ति का केंद्र बन चुकी है। यहां काम करने वाला हर व्यक्ति सेवा भाव से जुड़ा रहता है। 40 वर्षों की इस यात्रा में कभी सेवा रुकी नहीं और न ही समर्पण में कोई कमी आई। यह परिवार आने वाली पीढ़ियों को भी इसी परंपरा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।