उत्तराखंड में लोक पर्व हरेले को काफी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हरेले को सुख समृद्धि व हरियाली का प्रतीक माना जाता है। उत्तराखंड के चंपावत जिले में भी हरेला पर्व को आज काफी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। सुबह माता बहनों के द्वारा अनाजों से तैयार किए गए हरेले से अपने भाइयों व बच्चों के सर का पूजन कर उनके लंबे जीवन की कामना की तथा उनकी आरती उतारी गई
विभिन्न अनाजों को बोकर तैयार किया हरेला
हरेला पर्व पर विशेष तौर पर कुमाऊनी व्यंजन तैयार किए गए तो वहीं भाइयों के द्वारा अपनी बहनों को विशेष उपहार दिए। मालूम हो मातृशक्ति के द्वारा हरेला पर्व के लगभग 9 दिन पहले से विभिन्न अनाजों को बोकर विशेष तौर पर हरेला तैयार किया जाता है तथा हरेले के दिन पूजा अर्चना कर तैयार हरेले को काटा जाता है तथा इस हरेले से माताएं बहने अपने भाइयों व बच्चों के सर का पूजन कर उनकी दीर्घायु जीवन तथा कष्टों के निवारण के लिए उनके सर का पूजन कर आरती उतारती है। जिले के लोहाघाट क्षेत्र में भी लोक पर्व हरेले को काफी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है तथा बड़ी तादाद में पौधारोपण किया जा रहा हैं।
हरियाली का प्रतीक लोक पर्व
मान्यता है हरेले के दिन जो भी पौधा लगाया जाता है वह कभी नहीं सूखता है और एक दिन विशाल वृक्ष में बदल जाता है। उत्तराखंड में लोक पर्व हरेले को सदियों से काफी धूमधाम से मनाया जाता है इसे हरियाली का प्रतीक कहा गया है। वहीं लोगों ने एक दूसरे को लोक पर्व हरेला की बधाइयां दी है। हरेले को लेकर बच्चों व मातृशक्ति में काफी उत्साह नजर आया। वही आज चंपावत जिले में कई स्थानों पर हरेला के अवसर पर मेले का आयोजन किया जा रहा है।