देहरादून. उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं संचालित करने वाले ऑपरेटरों ने नए नियम का विरोध करते हुए सेवाएं स्थगित करने की चेतावनी दी है। 11 हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों के समूह ने कहा है कि यदि दो पायलट अनिवार्य करने की शर्त पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो वे सोमवार से चारधाम चार्टर सेवाएं बंद कर सकते हैं। यह चेतावनी जोशीमठ क्षेत्र में हुई हालिया दुर्घटना के तुरंत बाद आई है। ऑपरेटरों का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में यह नियम उनके लिए व्यावसायिक रूप से अव्यवहारिक है। इससे पूरे चारधाम हेलीकॉप्टर संचालन पर अनिश्चितता छा गई है।
दो पायलट अनिवार्य करने का नया नियम
नागर विमानन महानिदेशालय ने बद्रीनाथ क्षेत्र में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद हर उड़ान पर दो पायलट अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। इस नियम के लागू होने से ऑपरेटरों को प्रत्येक उड़ान के लिए अतिरिक्त पायलट की व्यवस्था करनी होगी। इससे न केवल चालक दल की संख्या बढ़ेगी बल्कि आवास, रसद और अन्य परिचालन खर्चों में भी भारी वृद्धि होगी। ऑपरेटरों का मानना है कि मौजूदा चार्टर दरों और सीमित लाभ मार्जिन के बीच इन अतिरिक्त लागतों को वहन करना संभव नहीं है। नियम को वर्तमान रूप में स्वीकार करना उनके लिए कठिन हो गया है।
ऑपरेटरों का सामूहिक विरोध और पत्र
11 हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों ने 31 अक्टूबर को नागर विमानन महानिदेशालय को संबोधित पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान स्वरूप में दो पायलट की अनिवार्यता को स्वीकार करने में असमर्थ हैं। उन्होंने 2 नवंबर से चारधाम चार्टर संचालन निलंबित करने का प्रस्ताव रखा है जब तक कि अधिकारी निर्णय की समीक्षा कर आपसी सहमति वाला समाधान नहीं निकाल लेते। यह सामूहिक प्रतिनिधित्व दुर्घटना के एक दिन बाद दिया गया। ऑपरेटरों ने नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की है।
बढ़ते खर्च और व्यावसायिक चुनौतियां
ऑपरेटरों ने पत्र में कहा है कि प्रत्येक चार्टर उड़ान पर दो पायलट तैनात करने से परिचालन लागत, चालक दल की आवश्यकता, आवास और रसद खर्च तथा समग्र प्रतिबद्धताएं काफी बढ़ जाएंगी। मौजूदा व्यावसायिक ढांचे, प्रचलित चार्टर दरों और सीमित लाभ मार्जिन को देखते हुए इन अतिरिक्त लागतों को स्वयं वहन करना संभव नहीं है। पूरी अतिरिक्त लागत यात्रियों पर डालना भी व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं माना जा रहा। इस स्थिति में सेवाएं जारी रखना उनके लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन जाएगा।
जोशीमठ दुर्घटना की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद जोशीमठ क्षेत्र में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद सामने आया है। ट्रांस भारत एविएशन द्वारा संचालित हेलीकॉप्टर शुक्रवार को बद्रीनाथ से देहरादून लौटते समय छई गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाने के उद्देश्य से दो पायलट अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया। ऑपरेटरों का कहना है कि सुरक्षा महत्वपूर्ण है लेकिन नियम बनाते समय व्यावसायिक व्यवहार्यता पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगे की राह और संभावित समाधान
ऑपरेटरों ने नागर विमानन महानिदेशालय से अनुरोध किया है कि निर्णय की समीक्षा कर आपसी सहमति वाला व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। यदि शीघ्र कोई मध्य मार्ग नहीं निकला तो चारधाम हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं जिसका सीधा असर तीर्थयात्रियों पर पड़ेगा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत से ऐसा समाधान निकाला जा सकता है जिसमें सुरक्षा मानकों के साथ-साथ ऑपरेटरों की आर्थिक व्यवहार्यता भी बनी रहे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।