पिछले वर्ष धराली क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा की भयावह यादें अभी लोगों के जहन से पूरी तरह धुंधली भी नहीं हुई हैं कि एक बार फिर हर्षिल क्षेत्र पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। लगातार हो रही बारिश से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। वहीं आपदा के बाद प्रस्तावित सुरक्षा दीवार का निर्माण एक वर्ष बीत जाने के बाद भी शुरू नहीं होने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को दिया ज्ञापन
भटवाड़ी विकासखंड के ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को ज्ञापन सौंपकर हर्षिल क्षेत्र में सुरक्षा कार्यों को तत्काल शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र को फिर से गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार धराली आपदा के बाद शासन और प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने का आश्वासन दिया था। इसी क्रम में हर्षिल में नदी किनारे सुरक्षा दीवार निर्माण की योजना भी बनाई गई थी लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। मानसून के दौरान नदी का बढ़ता जलस्तर गांवों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
झील बनने की सूचना को चिंताजनक
स्थानीय लोगों ने हर्षिल के पीछे स्थित तेलगाड़ क्षेत्र में झील बनने की सूचना को भी बेहद चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि यदि लगातार बारिश के कारण झील का जलस्तर बढ़ता है और किसी कारणवश झील टूट जाती है तो हर्षिल धराली और आसपास के कई गांवों में भारी तबाही मच सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर क्षेत्र का तत्काल वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए संभावित खतरे का आकलन किया जाए और आवश्यक सुरक्षा उपाय जल्द लागू किए जाएं।
धराली और हर्षिल उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। सेब के बागानों प्राकृतिक सौंदर्य और गंगोत्री धाम यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण हर वर्ष यहां हजारों देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पिछले वर्ष आई आपदा से होटल होमस्टे टैक्सी व्यवसाय दुकानों और स्थानीय व्यापार को भारी नुकसान हुआ था। इस वर्ष पर्यटन गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं लेकिन यदि सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत नहीं किया गया तो पर्यटन उद्योग को एक बार फिर बड़ा झटका लग सकता है।
सुरक्षा कार्यों को पूरा करने की मांग
जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से सुरक्षा दीवार निर्माण सहित सभी लंबित सुरक्षा कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर बीतता दिन संभावित खतरे को बढ़ा रहा है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्रवासी आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।
जिलाधिकारी ने दिया कार्रवाई का भरोसा
जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य ने कहा कि हर्षिल क्षेत्र से संबंधित ग्रामीणों की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं अधिकारियों के साथ हर्षिल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित सुरक्षा दीवार नदी के बढ़ते जलस्तर और तेलगाड़ क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत जायजा लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की जाएगी ताकि किसी भी संभावित आपदा से समय रहते प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।