कोलकाता: पश्चिम बंगाल में इस बार मानसून उम्मीद के मुताबिक सक्रिय नहीं हो पाया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जून 2026 पिछले 125 वर्षों में पांचवां सबसे सूखा जून साबित हुआ। दक्षिण बंगाल में औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उत्तर और दक्षिण बंगाल में बारिश का बड़ा अंतर
जहां उत्तर बंगाल और सिक्किम में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, वहीं दक्षिण बंगाल के अधिकांश जिलों में बारिश का बड़ा अभाव देखने को मिला। कई जिलों में वर्षा की कमी 20 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है।
जुलाई के लिए राहत भी, चुनौती भी
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे राज्य के कई हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे महीने सामान्य से कम वर्षा रहने की आशंका अभी भी बनी हुई है।
धान की खेती पर टिकी किसानों की उम्मीद
अमन धान की बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण समय जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक माना जाता है। ऐसे में यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो किसानों को राहत मिल सकती है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने की स्थिति में खेती की लागत और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
जलभराव का भी बढ़ सकता है खतरा
मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि यदि निम्न दबाव मजबूत होता है तो कोलकाता और आसपास के शहरी इलाकों में कम समय में भारी बारिश हो सकती है। इससे जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
रिकॉर्ड में दर्ज सबसे सूखे जून
मौसम विभाग के 125 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 का जून महीना 92.2 मिमी बारिश के साथ पांचवां सबसे सूखा जून दर्ज किया गया। इससे पहले 1926 (94.95 मिमी), 1972 (95.96 मिमी), 2009 (87.5 मिमी) और 2014 (92.1 मिमी) में भी बेहद कम वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। इससे साफ है कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत सामान्य से काफी कमजोर रही।
जून में सबसे अधिक प्रभावित जिले
- मालदा – 50% कम बारिश
- पुरुलिया – 46% कम
- दक्षिण दिनाजपुर – 40% कम
- झाड़ग्राम – 39% कम
- बांकुड़ा – 32% कम
- उत्तर दिनाजपुर – 30% कम
- बीरभूम – 25% कम
- मुर्शिदाबाद – 25% कम
- दक्षिण 24 परगना – 21% कम
वहीं कोलकाता में जून के दौरान सामान्य से लगभग 29% अधिक वर्षा दर्ज की गई।