उत्तराखंड में जनपद टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग में पावन मकर संक्रांति के अवसर पर तीर्थ नगरी देवप्रयाग का संगम तट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। जब हिमालय की विभिन्न घाटियों से पहुंचीं देवी-देवताओं की डोलियों ने एक साथ गंगा के पवित्र जल में स्नान किया तो वहां मौजूद हजारों भक्त इस अद्भुत दृश्य को देख भाव-विभोर हो उठे।
शक्ति और भक्ति का अनूठा मिलन
इस पावन अवसर पर केदारनाथ धाम से पहुंचीं मां चामुंडा देवी, कालीमठ की सिद्धपीठ से आई मां कालीमाई और सेममुखेम के प्रसिद्ध भगवान नागराजा की डोलियों का संगम हुआ। इनके साथ ही उत्तराखंड के विभिन्न अंचलों से आई अनेक अन्य देव-डोलियों ने भी अलकनंदा-भागीरथी के संगम पर शाही स्नान किया। ढोल-दमाऊ की थाप और 'मां के जयकारों' से पूरी देवप्रयाग घाटी गूंज उठी। विशेष आकर्षण कालीमठ से आई मां काली की देवरा यात्रा रही, जो 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद संगम पहुंची है। 115 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा, नंगे पांव चलने का संकल्प और कठिन साधना के साथ भक्त इस डोली को लेकर पहुंचे हैं। मकर संक्रांति की सुबह जब पश्वा और निशानों के साथ इन डोलियों ने ब्रह्ममुहूर्त में स्नान किया, तो समूचा वातावरण देवमय हो गया।
रघुनाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धा
स्नान के उपरांत सभी दिव्य डोलियों ने भगवान श्री रघुनाथ महाराज के मंदिर में अर्घ्य दी। मंदिर प्रांगण में डोलियों के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। बदरीनाथ तीर्थ पुरोहित समाज ने इन अतिथियों (देव-डोलियों) का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत-सत्कार किया जनवरी अंत तक जारी रहेगी यात्रा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह डोलियां अब विभिन्न पड़ावों से होते हुए अपने गंतव्य को लौटेंगी। मां काली की डोली जनवरी अंत तक कालीमठ पहुंचेगी जिसके बाद आगामी वर्षों में केदारनाथ बदरीनाथ और पंचगाई भ्रमण के साथ आयुत यज्ञ का भव्य आयोजन होगा। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों देवरी भक्त पुजारी और स्थानीय श्रद्धालु मौजूद रहे।
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