प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान मकर संक्रांति से पूर्व दूसरे प्रमुख स्नान पर्व के रूप में एकादशी का विशेष महत्व रहा। बुधवार तड़के से ही संगम और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय के अनुसार, भोर से ही स्नान प्रारंभ हो गया था और सुबह छह बजे तक 9.5 लाख से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे।
मकर संक्रांति पर उमड़ने की उम्मीद एक से डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं की
प्रशासन का अनुमान है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति के मुख्य स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या एक से डेढ़ करोड़ तक पहुंच सकती है। अधिकारियों ने बताया कि एकादशी से स्नान का सिलसिला शुरू होने के कारण भीड़ का दबाव पहले ही बढ़ गया है। इससे पहले पौष पूर्णिमा के अवसर पर 31 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था, जबकि माघ मेला 2024 में यह आंकड़ा लगभग 28.95 लाख रहा था।
सुरक्षा व्यवस्था में तैनात 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मेला क्षेत्र में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे क्षेत्र में 10,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जो भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और आपात स्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। ड्रोन कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से भी मेला क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है।
भीड़ प्रबंधन के लिए पार्किंग और घाटों का विस्तार
मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि इस बार भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए 42 अस्थायी पार्किंग स्थल विकसित किए गए हैं, जहां लगभग एक लाख से अधिक वाहन खड़े किए जा सकते हैं। इसके साथ ही माघ मेला 2025-26 के लिए कुल 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है। इन घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
गंगा में जलस्तर बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम
माघ मेले के दौरान गंगा में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए कानपुर स्थित गंगा बैराज से प्रतिदिन 8000 क्यूसेक जल छोड़ा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे संगम क्षेत्र में स्नान के लिए उपयुक्त जलस्तर बना रहेगा और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।
षट्तिला एकादशी का धार्मिक महत्व
दारागंज में कर्मकांड कराने वाले पंडित रविशंकर मिश्रा के अनुसार, बुधवार को षट्तिला एकादशी का विशेष संयोग रहा। इस दिन छह प्रकार से तिल का प्रयोग करने का विधान है। काले तिल और काली गाय के दान का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने बताया कि एकादशी का मुहूर्त बुधवार रात नौ बजे से गुरुवार दोपहर डेढ़ बजे तक है, जबकि स्नान की दृष्टि से गुरुवार को पूरे दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल माना जाएगा।
आस्था, व्यवस्था और उत्सव का संगम
माघ मेले में एकादशी स्नान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ प्रशासनिक तैयारी भी पूरी तरह सक्रिय है। संगम तट पर उमड़ा यह जनसैलाब न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत तस्वीर भी प्रस्तुत करता है।
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