पौड़ी जिले के चौबट्टाखाल विधानसभा के पोखड़ा ब्लॉक अंतर्गत कोलागाड़ क्षेत्र के ग्राम भतकोट में चार वर्ष की मासूम बच्ची का तेंदुए का शिकार बन जाना केवल एक दुखद हादसा नहीं बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता का प्रतीक बनकर सामने आया है। यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है बल्कि उस सच्चाई को भी उजागर करती है जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
पोखड़ा में एक वर्ष के भीतर पांच घटना
स्थानीय लोगों के अनुसार पोखड़ा ब्लॉक में पिछले एक वर्ष के भीतर चार से पांच ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं जहां मासूमों और ग्रामीणों को तेंदुए ने अपना शिकार बनाया। इसके बावजूद न तो वन विभाग की ओर से कोई ठोस रणनीति बनाई गई और न ही प्रशासन ने प्रभावी निगरानी या सुरक्षा उपायों को लागू करने की गंभीरता दिखाई। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। दिनदहाड़े गांवों के आसपास उसकी मौजूदगी देखी जा रही है लेकिन इसके बावजूद न गश्त बढ़ाई गई न ही पिंजरे लगाने या चेतावनी तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए गए। ऐसे में लोगों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
सबसे ज्यादा सवाल जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर खड़े हो रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी घटना के बाद नेता मौके पर पहुंचे—संवेदना व्यक्त की मुआवजे की घोषणा की और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अगर यही सक्रियता पहले दिखाई जाती तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को केवल घटनाओं के बाद नहीं बल्कि पहले से योजनाबद्ध तरीके से रोकने की जरूरत है। इसके लिए वन विभाग प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी है। लेकिन वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि यह समन्वय पूरी तरह नदारद है।
नेताओं की यह उदासीनता केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ने जैसा है। जनता ने उन्हें इसलिए चुना है कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें और समस्याओं का समाधान निकालें न कि हर बार हादसे के बाद औपचारिकता निभाएं। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक मासूमों की जान यूं ही जाती रहेगी क्या हर बार एक नई घटना के बाद ही सिस्टम जागेगा या फिर इस बार कोई ठोस और स्थायी समाधान निकलेगा अगर अब भी जिम्मेदार नहीं चेते तो ये घटनाएं केवल आंकड़ों में बदल जाएंगी और समाज संवेदनहीनता के एक खतरनाक दौर में प्रवेश कर जाएगा।