यूजीसी से जुड़े प्रावधानों के विरोध में संत समाज अब खुलकर सड़क पर उतर आया है। इस मुद्दे को लेकर संतों की पदयात्रा उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित सर्वानंद घाट से शुरू हुई जो विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए मंगलौर पहुंची। यहां बड़ी संख्या में साधु-संतों और समर्थकों ने एकजुट होकर प्रस्तावित प्रावधानों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
8 मार्च को रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन
मंगलौर के दहियाकी शिव मंदिर में आयोजित सभा में महंत यति रामस्वरूप गिरी के नेतृत्व में संतों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में धार्मिक संस्थाओं और संत समाज की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। संतों का आरोप है कि यूजीसी के कुछ प्रावधान पारंपरिक गुरुकुल व्यवस्था और धार्मिक शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकते हैं।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि विवादित प्रावधानों को वापस नहीं लिया गया तो देशभर में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा। संत समाज इस पदयात्रा को धर्म और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का अभियान बताते हुए लगातार जनसमर्थन जुटा रहा है। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु और स्थानीय लोग पदयात्रा का स्वागत कर रहे हैं।
संतों ने घोषणा की है कि यह पदयात्रा दिल्ली पहुंचकर 8 मार्च को रामलीला मैदान में एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के साथ समाप्त होगी। वहां आगे की रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा घोषित की जाएगी।
फिलहाल मंगलौर में पदयात्रा को लेकर माहौल आंदोलनकारी बना हुआ है। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। संत समाज ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा लेकिन अपनी मांगों को लेकर वे पीछे नहीं हटेंगे।
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