लखनऊ- उत्तर प्रदेश में सहायक आचार्य पुनर्परीक्षा को लेकर इस बार तकनीक का ऐसा इस्तेमाल देखने को मिला, जिसने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को नई ऊंचाई दे दी। Yogi Adityanath सरकार के कार्यकाल में आयोजित इस परीक्षा में एआई आधारित निगरानी ने नकल पर पूरी तरह लगाम लगा दी।
53 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और नकलविहीन परीक्षा
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 17 विषयों की पुनर्परीक्षा प्रदेश के 53 केंद्रों पर सफलतापूर्वक आयोजित की गई। परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और कहीं से भी नकल या अव्यवस्था की खबर नहीं आई।
19,718 अभ्यर्थियों ने लिया हिस्सा
इस परीक्षा में कुल 19,718 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें 41.35% महिलाएं और 58.65% पुरुष उम्मीदवार रहे। यह आंकड़ा परीक्षा के प्रति युवाओं की गंभीरता को दर्शाता है।
6 शहरों में दो पालियों में हुआ आयोजन
परीक्षा आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों में आयोजित की गई।
पहली पाली: सुबह 9:30 से 11:30 बजे
दूसरी पाली: दोपहर 2:30 से 4:30 बजे
17 विषयों की हुई परीक्षा
इस पुनर्परीक्षा में एशियन कल्चर, केमिस्ट्री, हिंदी, इंग्लिश, फिजिकल एजुकेशन, जूलॉजी, बॉटनी, लॉ, फिलॉसफी, एंथ्रोपोलॉजी समेत कुल 17 विषय शामिल रहे।
एआई कंट्रोल रूम से सख्त निगरानी
आयोग के मुख्यालय में बने एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से सभी परीक्षा केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की गई।
Dr. Prashant Kumar समेत वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में एआई कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी गई।
लखनऊ केंद्र पर आग, लेकिन परीक्षा प्रभावित नहीं
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित केंद्र पर परीक्षा से पहले एसी वायरिंग में आग लग गई थी, लेकिन प्रशासन ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया। वैकल्पिक व्यवस्था के साथ परीक्षा समय पर पूरी कराई गई।
पारदर्शिता का नया उदाहरण बनी परीक्षा
कड़ी निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था के चलते यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और व्यवस्थित रही। एआई आधारित यह मॉडल अब भविष्य की परीक्षाओं के लिए भी उदाहरण माना जा रहा है।