कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में '21 जुलाई शहीद दिवस' का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन 2026 में यह दिन एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर पेश कर रहा है। कोलकाता आज पूरी तरह से सियासी गतिविधियों के केंद्र में है। इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आंतरिक बिखराव और बढ़ती गुटबाजी का असर साफ़ है, जिसके चलते शहर में तीन अलग-अलग मंच तैयार किए गए हैं। वहीं, कांग्रेस ने भी अपने अलग कार्यक्रम का ऐलान कर राज्य की सियासत में हलचल बढ़ा दी है।
तीन मंच और बदली हुई राजनीतिक बिसात
इस वर्ष शहीद दिवस की परंपरा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों के कारण मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ अन्य मंचों से भी राजनीतिक संदेश देने की तैयारी है। जहां एक ओर TMC के अलग-अलग धड़े अपनी ताकत दिखाने के लिए सक्रिय हैं, वहीं कांग्रेस ने भी उन लोगों के लिए अपना कार्यक्रम आयोजित किया है जिन्हें वे उपेक्षित मानती है। यह शक्ति प्रदर्शन 2026 के आगामी चुनावों के लिए एक नई राजनीतिक बिसात बिछाने जैसा है।
कोलकाता पुलिस का 'हाई अलर्ट', अभेद्य सुरक्षा घेरा
शहर में तीन बड़ी जनसभाओं और हजारों की संभावित भीड़ के मद्देनजर कोलकाता पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे शहर को सुरक्षा के अभेद्य घेरे में रखा गया है और 1,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। मुख्य आयोजन स्थलों पर ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और क्यूआरटी (QRT) टीमों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। पुलिस का मुख्य लक्ष्य भीड़ को नियंत्रित करना और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।
यातायात पर असर और नागरिकों की परेशानी
सियासी आयोजनों और सुरक्षा घेरे के चलते कोलकाता की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के प्रमुख मार्गों को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया गया है या डायवर्ट कर दिया गया है। कार्यालय जाने वाले लोगों और आम नागरिकों को भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग चुनने और बहुत जरूरी होने पर ही घर से निकलने की सलाह दी है।
सियासी रार: हमले के दावों के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस बीच ममता बनर्जी ने अपनी सभा के दौरान 'हमले' की आशंका जताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राजनीतिक पारा और गरम हो गया है। विपक्षी दलों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे केवल 'सहानुभूति बटोरने का ड्रामा' बताया है। आज की इन सभाओं के माध्यम से सभी दल न केवल अपने समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि जनता के बीच यह संदेश देने की होड़ भी है कि बंगाल TMC की असली 'शक्ति' किसके पास है।