नई दिल्ली: अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संगठनात्मक ढांचे और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सोमवार को पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना विस्तृत पक्ष रखा और दावा किया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल 2027 तक वैध है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि समिति का कार्यकाल समाप्त होने का दावा तथ्यों और पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं है।
चुनाव आयोग को सौंपा विस्तृत जवाब
तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने बताया कि पार्टी को एक शिकायत के आधार पर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण देने के लिए कहा था। इसके जवाब में सोमवार को विस्तृत दस्तावेज जमा किए गए। पार्टी का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति पूरी तरह संवैधानिक रूप से कार्यरत है और उसका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है।
2027 तक वैध है राष्ट्रीय कार्यकारिणी
पार्टी के अनुसार, वर्ष 2000 में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता मिलने के बाद संगठन के संविधान में संशोधन कर कार्यकारिणी का कार्यकाल बढ़ाया गया था। बाद में 2006 में इसे पांच वर्ष कर दिया गया। चूंकि पार्टी का अंतिम आंतरिक चुनाव 2022 में हुआ था, इसलिए वर्तमान कार्यकारिणी 2027 तक वैध रहेगी।
वरिष्ठ नेताओं ने रखा पार्टी का पक्ष
चुनाव आयोग में पार्टी का पक्ष रखने के लिए सांसद महुआ मोइत्रा, राज्यसभा सांसद सागरिका घोष और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने पार्टी के संविधान और संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए।
शिकायत को बताया निराधार
तृणमूल का कहना है कि समिति का कार्यकाल समाप्त होने का आरोप पार्टी के संविधान के विपरीत है। पार्टी ने चुनाव आयोग से अपने पक्ष पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि संगठन की वर्तमान संरचना पूरी तरह वैध और प्रभावी है।