कोलकाता: दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश में दुर्गा प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटना को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार, धार्मिक स्थलों और बंगाल की महान विभूतियों के अपमान के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने बंगाल के साहित्यकारों, कवियों, फिल्मी हस्तियों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
बांग्लादेश में लोकतंत्र नहीं, असामाजिक तत्वों का शासन: शमिक
बांग्लादेश की स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो चुकी है और देश असामाजिक तत्वों के प्रभाव में चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोग लगातार उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दुर्गा पूजा से पहले प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और उनके अधिकारों का भी सवाल है।
हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ बंगाल के लोग सड़क पर उतरें: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
शमिक भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल के आम लोगों से बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों को सामने आना चाहिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जताना और कथित अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी शुरू से ही घुसपैठ के मुद्दे पर आवाज उठाती रही है।
गौतम घोष और प्रसेनजीत चटर्जी की चुप्पी पर सवाल
बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार के मुद्दे पर बंगाल के सांस्कृतिक जगत की भूमिका पर भी शमिक भट्टाचार्य ने सवाल उठाए। उन्होंने फिल्म निर्देशक गौतम घोष और अभिनेता प्रसेनजीत चटर्जी का नाम लेते हुए पूछा कि इस मुद्दे पर वे खुलकर विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं। शमिक ने कहा कि बांग्लादेश के साथ जिन लोगों का सांस्कृतिक और फिल्मी जगत के जरिए संपर्क रहा है, उन्हें इस समय अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया, “गौतम घोष, प्रसेनजीत चटर्जी कहां हैं? वे कुछ बोल क्यों नहीं रहे हैं? वे सड़क पर क्यों नहीं उतर रहे हैं? हम उनसे विरोध की आवाज सुनना चाहते हैं।” हालांकि, यह टिप्पणी शमिक भट्टाचार्य की राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
‘सुरक्षित जगह पर बैठकर संस्कृति की बात करना काफी नहीं’
शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि सुरक्षित माहौल में बैठकर संस्कृति, सिनेमा और साहित्य की चर्चा करना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, जब हिंदुओं की सुरक्षा और बंगाल की महान विभूतियों के सम्मान से जुड़े सवाल उठ रहे हैं, तब सांस्कृतिक जगत के लोगों को भी खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गौतम घोष और प्रसेनजीत चटर्जी को लेकर उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। उनका सवाल उन लोगों से है, जो बंगाली भाषा, साहित्य और संस्कृति की एकता की बात करते हैं। शमिक ने कहा कि जब एপার बंगाल और ओপার बंगाल की सांस्कृतिक एकता की बात होती है, तो बांग्लादेश में कथित अत्याचार के मुद्दे पर भी उसी संवेदनशीलता के साथ आवाज उठनी चाहिए।
कवि, साहित्यकार और थिएटरकर्मी भी विरोध में शामिल हों: शमिक
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कवियों, साहित्यकारों, नाटककारों, थिएटरकर्मियों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंगाली भाषा और संस्कृति की एकता का संदेश देने वाले लोगों की जिम्मेदारी है कि वे संकट के समय भी अपनी आवाज उठाएं।
शमिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि 1947 से लेकर अब तक बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं लगातार होती रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के नजरिए से भी देखना चाहिए।
इस्कॉन के एक संन्यासी के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के मुद्दे पर शमिक भट्टाचार्य ने इस्कॉन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस्कॉन के एक संन्यासी ने हिंदुओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए आवाज उठाई थी तथा लोगों को संगठित करने की कोशिश की थी। हालांकि, उनके आरोप के मुताबिक, बाद में इस्कॉन ने उस संन्यासी से संबंध तोड़ लिए।
शमिक ने कहा कि उक्त संन्यासी लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे थे कि बांग्लादेश उनका भी देश है और उन्हें अपनी जमीन छोड़कर नहीं जाना चाहिए। उन्होंने भारत को बांग्लादेश का मित्र बताते हुए दोनों देशों के बीच संबंधों की अहमियत पर भी जोर दिया था।
इस्कॉन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों के साथ खड़ा होना चाहिए। उनके मुताबिक, सच्चाई को नजरअंदाज करके या विरोध करने वालों की आवाज को दबाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।
इंदिरा गांधी के नाम वाली लाइब्रेरी में आग लगाने का आरोप
बांग्लादेश में कथित तोड़फोड़ और हिंसा के मुद्दे पर शमिक भट्टाचार्य ने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी के नाम से जुड़ी एक लाइब्रेरी में आग लगाई गई है। इस घटना की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के निर्माण में इंदिरा गांधी की ऐतिहासिक भूमिका रही है और उनसे जुड़ी संस्था को निशाना बनाए जाने का आरोप गंभीर है।
शमिक ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आम लोगों से आवाज उठाने की अपील की।
रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर कालिख लगाने का दावा
शमिक भट्टाचार्य ने विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर कालिख लगाने का आरोप लगाते हुए भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में बंगाल की महान विभूतियों को निशाना बनाए जाने की खबरें चिंताजनक हैं। उनके मुताबिक, बंगाली भाषा, साहित्य और संस्कृति के साथ गहराई से जुड़े व्यक्तित्वों का अपमान व्यापक बंगाली समाज की भावनाओं को आहत करता है।
बांग्लादेश के मुद्दे पर सांस्कृतिक जगत से सक्रिय भूमिका की मांग
शमिक भट्टाचार्य के बयान में बांग्लादेश सरकार की आलोचना के साथ-साथ बंगाल के सांस्कृतिक जगत से भी सक्रिय भूमिका निभाने की मांग सामने आई है। उन्होंने कहा कि जो लोग मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और बंगाली भाषा-संस्कृति की बात करते हैं, उन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा और महान विभूतियों के कथित अपमान के मुद्दे पर भी बोलना चाहिए।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल के लोगों से विरोध में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर चुप्पी उचित नहीं है। उन्होंने कवियों, साहित्यकारों, थिएटरकर्मियों और फिल्म जगत की हस्तियों से भी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया।