कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने अमेरिका जाकर आंखों का इलाज कराने की उनकी विदेश यात्रा संबंधी याचिका खारिज कर दी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आया, जिसमें हाईकोर्ट को एक सप्ताह के भीतर मामले का निपटारा करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हुई सुनवाई
अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट में सुनवाई में देरी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि अभिषेक बनर्जी को 6 अगस्त को एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा, ताकि यह तय किया जा सके कि उनका इलाज भारत में संभव है या विदेश जाना वास्तव में आवश्यक है।
15 लंबित मामलों पर अदालत की चिंता
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगभग 15 आपराधिक मामले और एफआईआर लंबित हैं। अदालत ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि वे विदेश जाते हैं तो लंबित मामलों की सुनवाई और जांच प्रभावित हो सकती है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टिप्पणी की कि अदालत की प्राथमिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि याचिकाकर्ता को उचित चिकित्सा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की चिकित्सा व्यवस्था सक्षम है और केवल विदेश में इलाज कराने की इच्छा अपने आप में पर्याप्त आधार नहीं हो सकती।
बचाव पक्ष ने दी ये दलीलें
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन और अयन भट्टाचार्य ने अदालत में कहा कि अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स अस्पताल में उनकी पहले भी आंखों की दो सर्जरी हो चुकी हैं और वहीं के डॉक्टर उनके पूरे मेडिकल इतिहास से परिचित हैं। उनका तर्क था कि इलाज की निरंतरता बनाए रखने के लिए उसी अस्पताल में उपचार आवश्यक है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच अभिषेक बनर्जी कई बार इलाज के लिए विदेश गए और हर बार निर्धारित समय के भीतर भारत लौटे। उनके परिवार का स्थायी निवास कोलकाता में है और उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी दलील दी कि प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद के डॉक्टर और अस्पताल से इलाज कराने का अधिकार है।
SSKM मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने से इनकार बना वजह
सुनवाई के दौरान अदालत ने बार-बार पूछा कि क्या अभिषेक बनर्जी एसएसकेएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने को तैयार हैं। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल अपनी पसंद के डॉक्टर से ही इलाज कराना चाहते हैं और मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश नहीं होंगे। इसी आधार पर न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि जब याचिकाकर्ता अदालत द्वारा सुझाए गए स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की राय लेने के लिए तैयार ही नहीं हैं, तो याचिका पर आगे विचार करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके बाद अदालत ने विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका खारिज कर दी।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल अभिषेक बनर्जी को विदेश जाकर इलाज कराने की अनुमति नहीं मिली है। यदि वे इस आदेश को चुनौती देना चाहते हैं, तो उनके पास उच्चतम न्यायालय का रुख करने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।