कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले (Coal Smuggling Case) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में बुदबुद थाने के पूर्व ओसी (थाना प्रभारी) मनोरंजन मंडल को फिर से तलब किया है। इसके साथ ही कोयला तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े शहर के करीब 12 बड़े व्यवसायी भी अब ईडी के रडार पर आ गए हैं।ईडी के जांचकर्ताओं ने इन सभी को अगले सप्ताह कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित 'सीजीओ कॉम्प्लेक्स' (CGO Complex) में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
मोटे कमिशन के बदले माफियाओं को 'ग्रीन सिग्नल' देने का आरोप
पूर्व ओसी मनोरंजन मंडल पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस पद पर रहते हुए कोयला माफियाओं को अवैध कारोबार चलाने के लिए सुरक्षा (प्रोटेक्शन) दी थी। इसके एवज में उन्होंने माफियाओं से मोटी रकम घूस के तौर पर वसूली थी। मोटी घूस लेकर वह कोयला तस्करों को अवैध रूप से कोयला पार कराने का 'ग्रीन सिग्नल' देते थे।
इससे पहले भी मनोरंजन मंडल को ईडी कई बार समन जारी कर चुकी है, लेकिन वह एक बार भी केंद्रीय जांच एजेंसी के दफ्तर में पेश नहीं हुए। पिछले साल ईडी की टीम ने दुर्गापुर स्थित उनके आवास पर जाकर कई बार नोटिस भी चपकाया था। राज्य में प्रशासनिक फेरबदल के बीच एक बार फिर ईडी ने उन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
शहर के 12 कारोबारी ईडी के निशाने पर, इन्हें मिला समन
कोयला घोटाले के पैसों के लेन-देन और रूट का पता लगाने के लिए ईडी ने अब कारोबारियों पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी की नजर शहर के करीब 12 कारोबारियों पर है, जिनके तार इस तस्करी से जुड़े हो सकते हैं। ईडी ने जिन प्रमुख व्यवसायियों को समन भेजकर अगले हफ्ते तलब किया है, उनमें शामिल हैं:
कृष्ण कयाल
रीतेश सिंह
लोकेश सिंह
युधिष्ठिर घोष
नरेंद्र खारका
अगले हफ्ते सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पूछताछ
जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इन कारोबारियों और पूर्व ओसी को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सकती है, ताकि यह साफ हो सके कि कोयला तस्करी की काली कमाई को कहां और किस तरह से खपाया गया (मनी लॉन्ड्रिंग) था। अगले हफ्ते होने वाली इस पूछताछ पर सबकी नजरें टिकी हैं।