दीघा: पश्चिम बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल दीघा में समुद्र तट को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन ने हॉकर्स और अस्थायी दुकानदारों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। पर्यटकों की सुविधा और समुद्र तट की सुंदरता बनाए रखने के नाम पर शुरू हुई इस कार्रवाई ने स्थानीय छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। कई वर्षों से दुकान चलाकर परिवार पालने वाले हॉकर्स अब अपने रोजगार को लेकर परेशान हैं। उनका सवाल है कि आखिर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उन्हें कैसे हटाया जा सकता है?
समुद्र तट से दुकानें हटाने का अभियान शुरू
जिला प्रशासन ने सोमवार को माइकिंग के जरिए हॉकर्स और अस्थायी दुकानदारों को दुकानें हटाने का निर्देश दिया था। इसके बाद मंगलवार दोपहर से समुद्र तट और आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रशासन का तर्क है कि दीघा में पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण सड़कों और समुद्र तट पर आवागमन सुगम बनाना जरूरी है।
10 से 20 साल पुराने दुकानदारों पर रोजी-रोटी का संकट
प्रशासन की इस कार्रवाई से उन छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो पिछले 10, 15 और यहां तक कि 20 वर्षों से दीघा में ठेले और अस्थायी दुकानें लगाकर अपना परिवार चला रहे हैं। हॉकर्स का कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह इसी कारोबार पर निर्भर है। अचानक दुकानें हटाए जाने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्टॉल आवंटन में गड़बड़ी का आरोप
दुकानदारों ने पिछली तृणमूल सरकार के कार्यकाल में स्टॉल आवंटन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि स्टॉल बनाए जाने के बावजूद लंबे समय से कारोबार कर रहे कई वास्तविक दुकानदारों को इसका लाभ नहीं मिला। हॉकर्स का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते बाहरी लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों के रिश्तेदारों को स्टॉल आवंटित किए गए। नतीजतन, वर्षों से कारोबार करने वाले कई दुकानदार सरकारी स्टॉल पाने से वंचित रह गए।
प्रशासन ने बताई कार्रवाई की वजह
प्रशासन के मुताबिक, दीघा में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सड़क और समुद्र तट के आसपास अस्थायी दुकानें होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। इसके अलावा समुद्र तट की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुकानों को हटाने का फैसला लिया गया है। हालांकि, भविष्य में हॉकर्स की समस्याओं पर विचार किए जाने की संभावना भी जताई गई है।
पुनर्वास के बिना कार्रवाई पर दुकानदारों का सवाल
हॉकर्स की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें हटाने से पहले वैकल्पिक रोजगार या पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। दुकानदारों का कहना है कि अगर उनकी दुकानें बंद हो गईं तो परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में प्रशासन को पहले उनके लिए वैकल्पिक दुकान या रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए। फिलहाल दीघा में प्रशासन की कार्रवाई और हॉकर्स की नाराजगी के बीच छोटे व्यापारियों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।