कोलकाता: पश्चिम बंगाल में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के भांगड़ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि राज्य पुलिस बिना किसी लिखित आदेश या आधिकारिक अधिसूचना के विभिन्न जिलों में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने या हटाने का दबाव बना रही है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) एस. एन. गुप्ता और कोलकाता पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
बिना लिखित आदेश कार्रवाई का आरोप
नौशाद सिद्दीकी का आरोप है कि कई जिलों में पुलिस अधिकारी मस्जिद प्रबंधन समितियों और इमामों से मौखिक रूप से लाउडस्पीकर हटाने को कह रहे हैं, लेकिन जब लिखित आदेश या सरकारी नोटिस की मांग की जाती है, तो कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया जाता। उनका कहना है कि यदि ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन की शिकायत है, तो कानून के अनुसार पहले नोटिस दिया जाना चाहिए और संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला, SOP जारी करने की मांग
अपने पत्र में ISF विधायक ने कहा कि बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाए धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करना संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 से 28 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने राज्य पुलिस से धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर एक स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कथित मनमानी कार्रवाई जारी रही, तो वे इस मामले को अदालत में चुनौती देंगे।
राज्यभर में ध्वनि प्रदूषण नियमों पर अभियान
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन को लेकर राज्यभर में अभियान चला रही है। इसी क्रम में विभिन्न धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग की समीक्षा की जा रही है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, नियमों के उल्लंघन के मामलों में 1,200 से अधिक मस्जिदों और लगभग 200 मंदिरों में लाउडस्पीकर हटाए गए हैं या उनकी ध्वनि निर्धारित सीमा के भीतर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
धार्मिक संगठनों ने भी जताई चिंता
नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के कुछ प्रतिनिधियों ने भी बिना लिखित आदेश कार्रवाई किए जाने के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन कोई कार्रवाई करता है तो वह स्पष्ट लिखित आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, ताकि किसी तरह का भ्रम या विवाद पैदा न हो।
अब पुलिस के जवाब का इंतजार
फिलहाल इस मामले पर राज्य पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं नौशाद सिद्दीकी का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी नियम का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सभी धार्मिक संस्थानों के साथ कानून के तहत समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। ऐसे में अब सबकी नजर DGP और राज्य पुलिस की ओर से आने वाले जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।