जलपाईगुड़ी: पश्चिम बंगाल सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से जलपाईगुड़ी के चालसा में नॉर्थ बंगाल स्टेकहोल्डर्स मीट का आयोजन किया गया। बैठक में निवेशकों, चाय बागान मालिकों, पर्यटन सेवा प्रदाताओं, होमस्टे संचालकों और स्थानीय समुदायों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य उत्तर बंगाल में पर्यटन की संभावनाओं को निवेश, रोजगार और बेहतर पर्यटक सुविधाओं में बदलना रहा।
उत्तर बंगाल के पर्यटन विकास पर बड़ा फोकस
जलपाईगुड़ी को डूआर्स के प्रवेश द्वार के तौर पर विकसित करने की योजना पर जोर दिया गया। चाय, जंगल, नदियां और धार्मिक स्थलों को पर्यटन विकास के प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। सिलिगुड़ी, भूटान, सिक्किम और बांग्लादेश के नजदीक होने के कारण जलपाईगुड़ी को निवेश और पर्यटन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तर बंगाल के लिए करीब ₹4,976 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। इन निवेशों से क्षेत्र में रोजगार के हजारों अवसर पैदा होने की उम्मीद है। अकेले जलपाईगुड़ी को करीब ₹700 करोड़ के निवेश मिले हैं, जिनसे लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
'ब्रांड बंगाल' के जरिए पर्यटन को नई पहचान
पर्यटन विभाग ने अगले तीन महीनों के भीतर नई ब्रांडिंग और मार्केटिंग रणनीति तैयार करने की बात कही है। इसमें चाय, हिमालय और डूआर्स को पश्चिम बंगाल के पर्यटन ब्रांड के प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रचारित किया जाएगा।
इसके साथ ही सामुदायिक पर्यटन के लिए करीब ₹50 करोड़ का बजट रखा गया है। उत्तर बंगाल में फिलहाल 1,820 होमस्टे दर्ज हैं। सरकार का लक्ष्य होमस्टे और स्थानीय समुदायों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से और मजबूती से जोड़ना है।
क्रॉस-बॉर्डर और आध्यात्मिक पर्यटन पर जोर
उत्तर बंगाल में सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिक्किम, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश को जोड़ने वाले पर्यटन सर्किट विकसित करने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा आध्यात्मिक पर्यटन, वेलनेस, मनोरंजन और अवकाश आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजना है।
चाय बागानों में ठहरने की सुविधा को बढ़ावा देने के लिए Tea Estate Stay Scheme पर भी काम किया जा रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद इंडस्ट्री स्टेटस से जुड़े प्रोत्साहनों के जरिए नए निवेश को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।
जलपाईगुड़ी में पर्यटन के छह बड़े अवसर
जलपाईगुड़ी में पर्यटन विकास के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है। इनमें चाय पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन, रिवरफ्रंट और बर्डिंग, आध्यात्मिक पर्यटन, वेलनेस एवं लीजर पर्यटन और होमस्टे शामिल हैं।
जिले में 150 से अधिक चाय बागान, 10 हजार से अधिक प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी, 8 प्रमुख मंदिर और 149 पंजीकृत होमस्टे हैं। वहीं, पर्यटन सेवाओं से जुड़े 12 पंजीकृत सेवा प्रदाता और 38 प्रशिक्षित गाइड मौजूद हैं, जबकि 124 अन्य गाइड प्रशिक्षण ले रहे हैं।
निवेशकों ने किया हजारों करोड़ के निवेश का ऐलान
विश्व पर्यटन दिवस पर पश्चिम बंगाल में कुल ₹11,784 करोड़ के निवेश की घोषणा 35 निवेशकों की ओर से की गई, जिससे करीब 20,784 रोजगार पैदा होने का प्रस्ताव है। उत्तर बंगाल को इसमें लगभग 42 प्रतिशत निवेश मिला है।
जलपाईगुड़ी में चार प्रमुख परियोजनाओं के जरिए करीब ₹700 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इनमें चालसा में BLG Group की ओर से ₹300 करोड़ की लागत से 100 कमरों वाला रिसॉर्ट और ब्रांडेड सेकेंड होम्स विकसित करने की योजना है। इससे करीब 200 प्रत्यक्ष और 600 से 700 निर्माण क्षेत्र के रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
Tulsa Group की ₹200 करोड़ की एंटरटेनमेंट और लीजर हब परियोजना से 2,000 से अधिक रोजगार का अनुमान है। Pomesh Healthcare करीब ₹100 करोड़ की लागत से 200 बेड का अस्पताल विकसित करेगा, जिससे मेडिको-वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ 500 से अधिक रोजगार की संभावना है। वहीं Ram Niwas Group ₹100 करोड़ की पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी परियोजना पर काम करेगा, जिससे करीब 300 रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा Sree Balaji Group की ओर से जलपाईगुड़ी और पूर्व मेदिनीपुर में परियोजनाओं के लिए करीब ₹800 करोड़ के निवेश की जानकारी दी गई है।
₹150 करोड़ का वान्य कुटीर रिसॉर्ट भी पाइपलाइन में
लाटागुड़ी में अंबुजा नियोटिया ग्रुप की ओर से करीब ₹150 करोड़ की लागत से वान्य कुटीर रिसॉर्ट प्रस्तावित है। इससे लगभग 250 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
जिले में मगुरमारी बायोडायवर्सिटी पार्क, बानरहाट स्थित सीतला माता मंदिर और धूमाबती पेटकाटी चंडीमाता मंदिर समेत कई परियोजनाओं पर भी काम प्रस्तावित है। 2026-27 के लिए तीन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹2.23 करोड़ बताई गई है, जिनसे 95 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
'वन डिस्ट्रिक्ट, वन डेस्टिनेशन' मॉडल पर पर्यटन विकास
बैठक में पर्यटन की योजना को राज्य स्तर से जिला स्तर पर ले जाने की बात कही गई। इसके तहत 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन डेस्टिनेशन' पहल के माध्यम से प्रत्येक जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों की पहचान कर उन्हें देश-विदेश में प्रचारित किया जाएगा।
राजगंज से पांच मंदिरों के पैकेज और धूपगुड़ी से टाउन डेवलपमेंट से जुड़े प्रस्ताव भी मिले हैं। ये राज्यभर से मिले 66 विधायक प्रस्तावों में शामिल हैं।
पर्यटकों की सुरक्षा और अवैध पर्यटन कारोबार पर सख्ती
पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए गए। जलपाईगुड़ी के पुलिस अधीक्षक से पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया, ताकि खतरे, धोखाधड़ी या अन्य समस्याओं की स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके।
सिटोंग में आग से जुड़े एक हादसे का उदाहरण देते हुए बिना पंजीकरण और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के पर्यटन कारोबार चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई। पर्यटन सेवा प्रदाताओं के लिए पंजीकरण, नियमों का पालन और सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण के साथ होगा पर्यटन विकास
बैठक में स्पष्ट किया गया कि पर्यटन विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। इको-सेंसिटिव जोन में निर्धारित नियमों और 'डूज एंड डोंट्स' को लागू करने में पर्यटन सेवा प्रदाताओं से सहयोग मांगा गया।
बक्सा टाइगर रिजर्व में संरक्षण प्रयासों और बढ़ती बाघों की संख्या का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ ही कराला नदी के सौंदर्यीकरण को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल करने की जरूरत बताई गई।
पर्यटन कारोबार के लिए NIDHI पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी
पर्यटन व्यवसायों को NIDHI (National Integrated Database of Hospitality Industry) पोर्टल पर पंजीकरण कराने की सलाह दी गई। इस पोर्टल के जरिए पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े प्रतिष्ठानों का पंजीकरण, वर्गीकरण और प्रबंधन किया जाता है।
NIDHI पर पंजीकरण के बाद संबंधित इकाई को यूनिक NIDHI ID, Incredible India और IRCTC पर प्रचार का अवसर, योजनाओं एवं प्रोत्साहनों तक पहुंच और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। होटल एवं अन्य ठहरने की सुविधाओं, कन्वेंशन सेंटर, फूड ऑपरेटर, ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर और पर्यटन सेवा प्रदाताओं समेत पांच तरह के कारोबार इसमें पंजीकरण करा सकते हैं।
दिसंबर में फिर होगी स्टेकहोल्डर्स मीट
पर्यटन मंत्री ने कहा कि स्टेकहोल्डर्स से लिखित सुझाव लिए जाएंगे और नीति निर्माण में उन्हें शामिल किया जाएगा। इसके बाद दिसंबर के आसपास पूजा के बाद एक और स्टेकहोल्डर्स सम्मेलन आयोजित कर प्रस्तावों पर हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
सरकार की ओर से पर्यटन नीति, होमस्टे पॉलिसी, B&B पॉलिसी और इंडस्ट्री इंसेंटिव पॉलिसी से जुड़े प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखे गए हैं। पर्यटन विभाग की प्राथमिकताओं में नए पर्यटन स्थलों का विकास, आधारभूत ढांचे को मजबूत करना और पर्यटन सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण बढ़ाना शामिल है।
नई वेबसाइट और पर्यटन ऐप होगा लॉन्च
पश्चिम बंगाल पर्यटन की वेबसाइट को नए रूप में दोबारा लॉन्च करने की तैयारी है। साथ ही पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए एक समर्पित Tourism App भी लॉन्च किया जाएगा।
राज्य सरकार देश और विदेश के प्रमुख पर्यटन मेलों में पश्चिम बंगाल की भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रही है। पुरुलिया पलाश फेस्टिवल और टी फेस्टिवल जैसे जिला स्तरीय आयोजनों को देशभर में प्रमोट किया जाएगा। कोलकाता में विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ फूड फेस्टिवल आयोजित करने की योजना भी है।
बैठक में पर्यटन विकास के साथ निवेश पर रिटर्न यानी ROI को भी महत्वपूर्ण बताया गया। सरकार और निजी निवेशकों दोनों के लिए परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया। इस तरह जलपाईगुड़ी के चाय बागान, जंगल, नदियां और धार्मिक स्थल अब निवेश, रोजगार और डूआर्स की नई पर्यटन पहचान के केंद्र में होंगे।