कोलकाता: कोलकाता में सफर करने वाले यात्रियों को आने वाले दिनों में बस यात्रा के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। पश्चिम बंगाल में निजी बस ऑपरेटरों ने एक बार फिर बस किराए में बढ़ोतरी की मांग तेज कर दी है। इस बार ऑपरेटरों ने साधारण बसों के लिए शुरुआती चार किलोमीटर का न्यूनतम किराया 18 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स ने किराया संशोधन से जुड़ा नया प्रस्ताव परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह को सौंपा है। ऑपरेटरों का कहना है कि मौजूदा किराया व्यवस्था में बसों का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ती परिचालन लागत और अन्य खर्चों के कारण निजी बस संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि, फिलहाल यह केवल प्रस्ताव है और राज्य सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक मंजूरी मिलना बाकी है।
साधारण बसों के किराए में कितनी बढ़ोतरी का प्रस्ताव?
निजी बस ऑपरेटरों की ओर से साधारण बसों के लिए दूरी के आधार पर नया किराया ढांचा पेश किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक, शुरुआती चार किलोमीटर तक यात्रियों को न्यूनतम 18 रुपये देने होंगे। वहीं, 4 से 6 किलोमीटर की यात्रा के लिए किराया 20 रुपये रखने की मांग की गई है। 6 से 8 किलोमीटर के लिए 22 रुपये और 8 से 12 किलोमीटर के लिए 24 रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा, 16 से 20 किलोमीटर की दूरी के लिए 28 रुपये किराया तय करने का सुझाव दिया गया है। वहीं, 20 से 22 किलोमीटर तक सफर करने वाले यात्रियों से 30 रुपये वसूलने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो कोलकाता में रोजाना बस से सफर करने वाले यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
जिला बसों के किराए में भी बदलाव की मांग
किराया बढ़ाने का प्रस्ताव केवल कोलकाता की साधारण बसों तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला स्तर पर चलने वाली बसों को भी इसमें शामिल किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, जिला बसों में शुरुआती चार किलोमीटर के लिए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने की मांग की गई है। इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त किलोमीटर के लिए 1.20 रुपये किराया बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। ऑपरेटरों का मानना है कि लंबी दूरी के रूट पर बसों का संचालन करना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। ईंधन, रखरखाव और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के चलते मौजूदा किराए से खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में जिला बसों के किराए में संशोधन को भी जरूरी बताया जा रहा है। इस बदलाव का असर अलग-अलग जिलों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों पर पड़ सकता है।
एक्सप्रेस, AC और Volvo बसों के लिए भी नए रेट प्रस्तावित
निजी बस ऑपरेटरों ने एक्सप्रेस और लग्जरी बस सेवाओं के किराए में भी बढ़ोतरी की मांग की है। प्रस्ताव के मुताबिक, एक्सप्रेस बसों के लिए न्यूनतम किराया 25 रुपये रखने का सुझाव दिया गया है। वहीं, AC बसों के लिए शुरुआती दूरी का न्यूनतम किराया 40 रुपये प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा, Volvo बसों के लिए न्यूनतम किराया 50 रुपये करने की मांग की गई है। ऑपरेटरों का कहना है कि इन बसों के संचालन और रखरखाव पर साधारण बसों की तुलना में अधिक खर्च आता है। ऐसे में मौजूदा किराया ढांचे में बदलाव किए बिना इन सेवाओं को जारी रखना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावित दरों पर अंतिम फैसला राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।
हावड़ा, दुर्गापुर, आसनसोल और मालदा की मिनी बसें भी शामिल
किराया संशोधन की मांग में राज्य के दूसरे प्रमुख शहरों को भी शामिल किया गया है। ऑपरेटरों ने हावड़ा, दुर्गापुर, आसनसोल और मालदा में चलने वाली मिनी बसों के किराए में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही दार्जिलिंग और राज्य के अन्य पहाड़ी इलाकों में संचालित बस सेवाओं के किराए की समीक्षा करने की मांग भी की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बसों का संचालन अलग तरह की चुनौतियों से जुड़ा होता है। सड़क की स्थिति, दूरी और परिचालन खर्च के कारण इन रूटों पर बस संचालकों को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है। ऑपरेटरों का तर्क है कि सभी क्षेत्रों में मौजूदा किराया व्यवस्था की समीक्षा करना जरूरी है। इसलिए नए प्रस्ताव में शहरी, जिला और पहाड़ी क्षेत्रों की बस सेवाओं को शामिल किया गया है।
2018 के बाद से नहीं बढ़ा निजी बसों का आधिकारिक किराया
बस ऑपरेटरों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में निजी बसों के किराए में आखिरी आधिकारिक संशोधन साल 2018 में किया गया था। इसके बाद से परिचालन लागत में लगातार बदलाव आया है, लेकिन किराए में आधिकारिक रूप से कोई संशोधन नहीं हुआ। ऑपरेटरों का दावा है कि बढ़ते खर्च और कम आमदनी के कारण कई बस संचालकों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि आर्थिक दबाव के चलते धीरे-धीरे सड़कों पर निजी बसों की संख्या में गिरावट आ रही है। यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसी वजह से बस संगठनों ने सरकार से जल्द किराया संशोधन पर विचार करने की अपील की है। अब सबकी नजर राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।
सरकार की मंजूरी का इंतजार, यात्रियों को फिलहाल राहत
निजी बस ऑपरेटरों की ओर से किराया बढ़ाने का प्रस्ताव परिवहन मंत्री को सौंप दिया गया है, लेकिन अभी तक सरकार ने नई दरों को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी है। इसका मतलब है कि फिलहाल प्रस्तावित किराए लागू नहीं हुए हैं। यात्रियों को अभी मौजूदा आधिकारिक किराया व्यवस्था के अनुसार ही भुगतान करना होगा। सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकता है। एक तरफ बस ऑपरेटर बढ़ती लागत का हवाला देकर किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ किराए में बढ़ोतरी का सीधा असर आम यात्रियों के बजट पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने बस संचालकों की आर्थिक परेशानियों और यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।