कोलकाता: कोलकाता नगर निगम (KMC) परिसर में शनिवार से प्रस्तावित वार्ड पुनर्गठन (डीलिमिटेशन) के मसौदे पर आम नागरिकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के दावों व आपत्तियों की औपचारिक सुनवाई शुरू हो गई है। आगामी नवंबर के अंत में प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पहले शहर के 209 वार्डों के इस भौगोलिक पुनर्गठन को प्रशासनिक व राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी अधिसूचना के तहत निगम मुख्यालय के 10 कमरों में नगर विकास विभाग के 10 डब्ल्यूबीसीएस (WBCS) अधिकारी नगर निगम कर्मियों के साथ इस सुनवाई प्रक्रिया को संचालित कर रहे हैं। पूरी सुनवाई का नेतृत्व निगम आयुक्त स्मिता पांडे कर रही हैं। इस प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस के दो अलग-अलग धड़ों ने अलग-अलग शिकायत दर्ज कराने के बावजूद लगभग एक जैसे ही आरोप लगाए।
सर्वदलीय उपस्थिति और पुरभवन में राजनीतिक गरमाहट
सुनवाई के पहले दिन कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों और वामपंथी दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। डीलिमिटेशन को लेकर चल रही खींचतान के कारण शनिवार को दिनभर पुरभवन में राजनीतिक सरगर्मी बनी रही। तृणमूल की ओर से विधायक जावेद खान के नेतृत्व में एक बड़ी टीम और कालीघाट-तृणमूल की ओर से पूर्व मेयर परिषद सदस्य वैश्वानर चट्टोपाध्याय व अंजन दास मौजूद थे। वहीं बीजेपी नेता अशोक सिन्हा के नेतृत्व में 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और बेलेघाट के विधायक कुणाल घोष भी पुरभवन पहुंचे। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव आशुतोष चटर्जी भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराने उपस्थित हुए।
विपक्षी दलों का आरोप: मतदाता आंकड़ों और सीमाओं में पक्षपात
सुनवाई में शामिल विपक्षी और सत्तारूढ़ दलों के प्रतिनिधियों ने वार्डों के सीमांकन और मतदाता संख्या में विसंगतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक नए वार्ड में औसतन 16 हजार मतदाता होने चाहिए। हालांकि, विरोधियों का आरोप है कि उत्तर कोलकाता के बीजेपी प्रभावित वार्ड 22 (7076 मतदाता), वार्ड 23 (6119 मतदाता) और वार्ड 42 (6841 मतदाता) में कम मतदाता होने के बावजूद उन्हें जोड़कर 16 हजार का आंकड़ा पूरा नहीं किया गया। इसके विपरीत, वार्ड 43 में 10,079 मतदाता होने के बाद भी उसे पड़ोसी वार्ड 44 के साथ मिला दिया गया है। तृणमूल के दोनों धड़ों का संयुक्त रूप से कहना है कि जहाँ बीजेपी कमजोर है, ऐसे 58 वार्डों को तोड़कर 123 नए वार्ड बनाए गए हैं, जबकि बाकी 86 वार्डों को लगभग यथावत रखा गया है।
बीजेपी का पलटवार और नागरिकों का स्वतःस्फूर्त विरोध
विपक्षी दलों और तृणमूल के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी नेताओं ने कहा कि आगामी नगर निगम चुनाव में अपनी संभावित हार को देखते हुए विरोधी पक्ष अभी से बहाने तलाश रहे हैं। वहीं, सुनवाई के दौरान शहर के आम निवासियों ने भी अपने-अपने वार्डों की सीमाओं में बदलाव को लेकर स्वतःस्फूर्त रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं। विरोधियों ने यह भी शिकायत की कि बार-बार मांग करने के बावजूद वार्ड पुनर्गठन को लेकर कोई 'फील्ड विजिट' नहीं की जा रही है और वार्डों के नए नक्शे केवल सत्ताधारी या बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। कांग्रेस का आरोप है कि आपत्तियों के लिए अलग से अलग-अलग नोटिस देने के बजाय उन्हें अन्य सुनवाई सत्रों के साथ मिलाया जा रहा है।
9 सितंबर तक चलेगी सुनवाई प्रक्रिया
वार्डों के नए परिसीमन पर प्राप्त आपत्तियों की यह सुनवाई प्रक्रिया आगामी 9 सितंबर तक जारी रहेगी। निगम प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों के तर्कों और लिखित आपत्तियों को रिकॉर्ड में लिया जा रहा है, जिसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। हालांकि, जिस तरह से सीमाओं के पुनर्गठन पर राजनीतिक दल और आम नागरिक अपनी नाराजगी जता रहे हैं, उससे साफ है कि चुनाव से पहले कोलकाता की नगर निगम राजनीति में यह मुद्दा अभी और गर्माने वाला है।