कोलकाता: साइबर वित्तीय अपराधों, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी और डिजिटल भुगतान से जुड़े बढ़ते मामलों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार में बुधवार (5 अगस्त 2026) को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने की। इसमें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), राष्ट्रीयकृत बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम) कुणाल अग्रवाल और साइबर अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
मनी ट्रेल पर रहेगी पैनी नजर
बैठक में साइबर ठगी के मामलों में सबसे पहले मनी ट्रेल (Money Trail) को तेजी से ट्रैक करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि धोखाधड़ी की शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों की पहचान कर उन्हें तत्काल फ्रीज किया जाना जरूरी है, ताकि अपराधियों तक धन पहुंचने से पहले उसे रोका जा सके। इसके लिए पुलिस और बैंकों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि समय पर कार्रवाई से पीड़ितों की रकम वापस मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
फर्जी लोन और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर चिंता
बैठक में हाल के महीनों में तेजी से बढ़े फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन, डिजिटल अरेस्ट, वर्क-फ्रॉम-होम, जॉब स्कैम और इंस्टेंट लोन ऐप से जुड़े साइबर अपराधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी ग्राहक के खाते में अचानक असामान्य या संदिग्ध लेन-देन दिखाई देता है, तो बैंक तुरंत KYC री-वेरिफिकेशन करें और बिना देरी किए पुलिस को इसकी सूचना दें। इससे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी।
बैंकों को तकनीकी सुरक्षा मजबूत करने की सलाह
लालबाजार ने सभी बैंकों को ग्राहक सत्यापन प्रणाली, फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट और डिजिटल सुरक्षा ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने की सलाह दी। आधुनिक तकनीक और उन्नत निगरानी प्रणाली के इस्तेमाल से साइबर धोखाधड़ी के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही रोकने पर जोर दिया गया।
संयुक्त रणनीति और जागरूकता अभियान पर जोर
बैठक में यह भी तय किया गया कि कोलकाता पुलिस, RBI और बैंकिंग संस्थान नियमित अंतराल पर संयुक्त बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। साथ ही आम लोगों को डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और साइबर धोखाधड़ी से बचने के तरीकों के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान भी चलाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस, बैंक और नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी और लोगों की डिजिटल वित्तीय सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।