पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में मतदाता सूची से नाम कटने को लेकर भड़की हिंसा और मोथाबाड़ी में जजों को बंधक बनाने की घटना ने अब प्रशासनिक और कानूनी हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहाँ जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच के घेरे में बड़े अधिकारियों को ले लिया है।
ADM शेख अंसार अहमद को शो-कॉज नोटिस
मालदा के जिलाधिकारी (DM) राजनवीर सिंह कपूर ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (जिला परिषद) शेख अंसार अहमद को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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आरोप: कर्तव्य पालन में विफलता और पिछले बुधवार (1 अप्रैल) को जिले में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को संभालने में नाकाम रहना।
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पृष्ठभूमि: मोथाबाड़ी, सुजापुर और इंग्लिश बाजार जैसे इलाकों में सड़क जाम और हिंसा के दौरान एडीएम स्थिति को नियंत्रित करने में विफल रहे थे।
NIA की कार्रवाई: ADM से पूछताछ और 150 लोगों को नोटिस
चुनाव आयोग के निर्देश पर NIA इस मामले की जांच कर रही है। रविवार को जांच के तीसरे दिन केंद्रीय एजेंसी ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी:
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ADM (विकास) से पूछताछ: अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अनिंद्य सरकार को कालियाचक-2 ब्लॉक कार्यालय बुलाकर पूछताछ की गई।
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स्थानीय लोगों पर शिकंजा: अब तक लगभग 150 लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है।
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दहशत का माहौल: NIA की पूछताछ के डर से कालियाचक और मोथाबाड़ी इलाके में रविवार को भी कई दुकानें बंद रहीं।
क्या जजों पर हमला एक साजिश थी?
NIA की एक टीम ने कोलकाता के बालीगंज जाकर उस जज से भी बात की है जो इस हमले के दौरान वहां मौजूद थे। जांच में कुछ चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं:
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा: "यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हमला था। भीड़ ने जजों के काफिले को निशाना बनाया, जिसके कारण पायलट कार गड्ढे में गिर गई। हमले में चालक और केंद्रीय बल के जवान घायल हुए हैं।"
एजेंसी ने इंग्लिश बाजार पुलिस लाइन के पास से CCTV फुटेज जब्त किए हैं ताकि हमले की साजिश और हमलावरों की पहचान की जा सके।
अब तक की गिरफ्तारियां
मोथाबाड़ी की घटना में पुलिस ने रविवार को 6 और लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस और NIA दोनों अब उन मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश में हैं जिन्होंने मतदाता सूची में संशोधन के नाम पर भीड़ को उकसाया था।
अगला कदम
NIA आज यानी सोमवार को अदालत में अपनी प्राथमिक रिपोर्ट पेश करेगी। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हो सकता है कि क्या इस हिंसा के पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश थी या यह प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा था।