कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बारुईपुर (सूर्यपुर) में नाबालिग लड़की के साथ हुई बर्बरता और हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस जघन्य अपराध के खिलाफ अब पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी खुद सड़कों पर उतर आई हैं। सोमवार शाम को उन्होंने ‘तुम्हारा सुर मेरा सुर, जस्टिस फॉर बारुईपुर’ के नारे के साथ कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास से एक विशाल मोमबत्ती मार्च (कैंडल मार्च) निकाला।
केंद्रीय बलों से टकराव, बैरिकेडिंग तोड़ी
ममता बनर्जी का यह विरोध प्रदर्शन शुरुआत से ही बेहद हाई-वोल्टेज रहा। जैसे ही वह अपने घर से बाहर निकलीं, गली के मुहाने पर ही केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उनका रास्ता रोक दिया। इसके बाद वहां तीखी उत्तेजना फैल गई। हालांकि, केंद्रीय बलों की तमाम बाधाओं को दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी ने खुद बैरिकेड तोड़ा और सुरक्षा घेरे को पार करते हुए हरीश चटर्जी स्ट्रीट की मुख्य सड़क पर मार्च का नेतृत्व किया।
सोशल मीडिया पर शुभेंदु सरकार पर तीखा हमला
ममता बनर्जी के सड़क पर उतरने से ठीक पहले, टीएमसी ने अपने ऑफिशियल 'X' (ट्विटर) हैंडल से वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। टीएमसी ने लिखा: "मिस्टर सुवेंदु अधिकारी, आप एक चरम पाखंडी हैं! ठीक वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार हो रही हिंसा के बावजूद मणिपुर जाने का समय नहीं मिला, वैसे ही आपकी निगरानी में बारुईपुर में जिस छोटी बच्ची की बेरहमी से दुष्कर्म और हत्या की गई, उसके परिवार से मिलने का समय आपके पास नहीं है।"
पार्टी ने आरोप लगाया कि पीड़ित माता-पिता को पहले भवानी भवन आकर मुख्यमंत्री से मिलने को कहा गया, क्योंकि वह अपने राजनीतिक कार्यक्रमों में व्यस्त थे।
हाई-वोल्टेज संडे: 'हाउस अरेस्ट' का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि रविवार रात को ही तैयार हो गई थी, जब अचानक पुलिस और केंद्रीय बलों की भारी टुकड़ियों ने ममता बनर्जी के कालीघाट आवास को चारों तरफ से घेर लिया। टीएमसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के इशारे पर पूर्व मुख्यमंत्री को 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) किया गया है ताकि वह बारुईपुर न जा सकें।
ममता बनर्जी ने खुद फेसबुक लाइव आकर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा: "जब से मैंने इस घटना के बारे में सुना है, मैं बेहद चिंतित हूं। इससे पहले भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, बेहाला और पानीहाटी जैसी कई जगहों पर बेटियां बर्बरता का शिकार हुईं। आज बारुईपुर की घटना ने भयानक रूप ले लिया है क्योंकि अब जनता के सब्र का बांध टूट चुका है। मैं पीड़ित परिवार से अकेले मिलने जाने वाली थी, लेकिन मेरे घर के बाहर लगभग 1000 पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात कर दिए गए। यह अघोषित हाउस अरेस्ट नहीं तो और क्या है?"
सोमवार सुबह बदला नजारा, आर-पार की जंग तय
रविवार की आधी रात के बाद से ममता बनर्जी के घर के बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल को हटाना शुरू किया गया। सोमवार सुबह तक वहां केवल उतनी ही सुरक्षा बची थी, जो एक पूर्व मुख्यमंत्री के प्रोटोकॉल के तहत मिलती है। इससे पहले रविवार को ही ममता बनर्जी ने पीड़िता के पिता से फोन पर बात कर सांत्वना दी थी।
जानकारों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद, राज्य में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सुवेंदु अधिकारी सरकार को चौतरफा घेरने के लिए टीएमसी ने इसे अपना सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया है। ममता बनर्जी के इस कैंडल मार्च ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र होने वाला है।