पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी शनिवार को जंगलमहल के केंद्र झारग्राम पहुँचीं। जामदा सर्कस मैदान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा प्रहार किया। ममता बनर्जी ने विशेष रूप से आदिवासियों की पहचान, संस्कृति और खान-पान के अधिकारों को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा किया।
आदिवासी समाज को निर्भय रहने का संदेश
चुनाव के दिन हिंसा की आशंका जताते हुए ममता ने कहा, "वोट के दिन मेरे आदिवासी भाई-बहनों को डराया जा सकता है, लेकिन आपके पास धमसा और मादल (पारंपरिक वाद्ययंत्र) है, फिर डर किस बात का? धमसा-मादल बजाते हुए और झाड़ू से रास्ता साफ करते हुए पोलिंग बूथ तक जाएँ।" उन्होंने आदिवासियों की तीरंदाजी कला का जिक्र करते हुए उन्हें अपनी शक्ति पहचानने को कहा।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर हमला
मुख्यमंत्री ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि यह लागू हुआ, तो आदिवासियों के अपने रीति-रिवाज और धार्मिक पहचान खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने वादा किया कि यदि तृणमूल सत्ता में लौटती है, तो आदिवासियों के सारी-सरना' धर्म को आधिकारिक मान्यता दी जाएगी।
भोजन की आजादी और भाजपा पर तंज:
बीजेपी शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए ममता ने कहा, "वे लोग तय करते हैं कि कौन क्या खाएगा। हम कभी नहीं कहते कि आप 'छत्तू' मत खाओ। किसी को यह हक नहीं है कि वह दूसरों के खान-पान या पहनावे में हस्तक्षेप करे। बंगाल में हम ऐसा कभी होने नहीं देंगे।"
अनुप्रवेश और सुरक्षा पर अमित शाह को घेरा
बिना नाम लिए केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केंद्र की जिम्मेदारी है। "अगर घुसपैठिए दाखिल हो रहे हैं, तो अमित शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए। घुसपैठ रोकना राज्य नहीं, केंद्र का काम है।" रैली में पूर्व जंगलमहल आंदोलनकारी नेता छत्रधर महतो की उपस्थिति ने भी राजनीतिक चर्चाओं को गर्म कर दिया है।