पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एसआईआर प्रक्रिया के तहत वोटर सूची की जांच के बाद राज्य में सबसे ज्यादा नाम यहीं से हटाए गए हैं। कुल 11 लाख 1 हजार 145 वोटरों के दस्तावेजों की जांच हुई, जिसमें से 4 लाख 55 हजार 137 लोगों को अवैध घोषित किया गया, जबकि 6 लाख 33 हजार 671 लोगों के दस्तावेज वैध पाए गए।
ट्राइब्यूनल में उमड़ी भारी भीड़
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जिले में अफरातफरी का माहौल बन गया है। मंगलवार सुबह से ही बहारामपुर ट्राइब्यूनल में हजारों की संख्या में लोग पहुंच गए। लोग अपने नाम फिर से वोटर सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
लंबी लाइन में खड़े लोगों की नाराजगी
ट्राइब्यूनल के बाहर लंबी कतारों में खड़े लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। हरिहरपाड़ा के एक दिव्यांग व्यक्ति ने कहा कि सुबह 9 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन दोपहर तक भी काम नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी दो बार बीडीओ कार्यालय में आवेदन देने के बावजूद कोई समाधान नहीं मिला।
परिवार के नाम हटने पर लोगों की परेशानी
दौलताबाद की रजिना बीबी ने बताया कि उनके परिवार के पांच भाई-बहन हैं, लेकिन अब आयोग कह रहा है कि वे छह थे और इसी आधार पर तीन लोगों के नाम हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े रहना बेहद मुश्किल हो रहा है।
कई विधानसभा क्षेत्रों में ज्यादा असर
जिले की 22 विधानसभा सीटों में रघुनाथगंज, भगवांगोला, शमशेरगंज, सूती और रानीनगर में सबसे ज्यादा वोटर जांच के दायरे में थे। शमशेरगंज में 1.19 लाख, सूती में 1.11 लाख, रघुनाथगंज में 1.09 लाख और भगवांगोला में 98 हजार से ज्यादा वोटर जांच के अधीन थे।
राजनीतिक विवाद हुआ तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक वोटरों को हटाने के लिए आयोग का दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।
नेताओं के बयान से बढ़ा विवाद
तृणमूल के नेता अपूर्व सरकार ने कहा कि यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है और उनकी पार्टी लोगों को उनका वोट अधिकार वापस दिलाने के लिए ट्राइब्यूनल में मदद कर रही है। वहीं कांग्रेस नेता अधीर चौधरी ने कहा कि कई जगहों पर लोग यह कह रहे हैं कि उनका नाम ही वोटर सूची में नहीं है, जिससे वे मतदान नहीं कर पाएंगे।