नदिया: पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के गांगनापुर के रहने वाले देवजीत भद्र ने तमाम मुश्किलों और आर्थिक तंगी को पीछे छोड़कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। शक्तिनगर जिला अस्पताल में एम्बुलेंस चालक के रूप में काम करने वाले देवजीत का चयन अब देश की अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ISRO में हुआ है।
12 घंटे की ड्यूटी के बाद करते थे पढ़ाई
देवजीत ने शक्तिनगर जिला अस्पताल में करीब 12 घंटे की कठिन ड्यूटी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। ड्यूटी के दौरान मिलने वाले खाली समय में किताबों से तैयारी करते और रात में घर लौटने के बाद भी पढ़ाई में जुटे रहते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
कई बार असफल हुए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
प्रतियोगी परीक्षाओं में देवजीत को लगातार पांच-छह बार असफलता का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफलता के बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका उन्होंने लंबे समय से सपना देखा था।
ISRO में टेक्नीशियन-B पद पर चयन
देवजीत भद्र को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में टेक्नीशियन-B के पद पर नियुक्ति मिली है। अब अस्पताल में एम्बुलेंस चलाने वाले देवजीत देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़कर नई जिम्मेदारी संभालेंगे।
चंद्रयान मिशन से मिली प्रेरणा
महज नौकरी हासिल करना देवजीत का लक्ष्य नहीं था। अंतरिक्ष और चंद्रयान मिशन से प्रभावित होकर उन्होंने ISRO में काम करने का सपना देखा था। वर्षों की मेहनत, असफलताओं के बीच कायम जिद और लगातार पढ़ाई ने आखिरकार उनके इस सपने को हकीकत में बदल दिया।
देवजीत की कहानी बताती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत के दम पर मंजिल हासिल की जा सकती है। उनकी सफलता से नदिया जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।