पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित बंगाल के विजन के तहत भारतीय रेलवे ने आद्रा और जॉयचंडीपहार के बीच 11 किलोमीटर लंबी बाईपास रेल लाइन को मंजूरी दी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹272 करोड़ है।
औद्योगिक कॉरिडोर पर मालगाड़ियों का दबाव होगा कम
नई बाईपास लाइन का सबसे बड़ा फायदा महत्वपूर्ण औद्योगिक रेल कॉरिडोर को मिलने की उम्मीद है। इसके बनने से मौजूदा रेल नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा और फ्रेट ट्रैफिक को अधिक सुचारु तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे औद्योगिक माल की आवाजाही में लगने वाला समय और परिचालन संबंधी बाधाएं कम करने में मदद मिलेगी।
SAIL और BCCL की सप्लाई चेन को मिलेगी रफ्तार
परियोजना से SAIL के लौह अयस्क और BCCL के कोयले की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। रेलवे की अतिरिक्त क्षमता से खनिज और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े माल के परिवहन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एनर्जी और मिनरल कॉरिडोर में पुरुलिया की अहमियत बढ़ेगी
रेलवे कनेक्टिविटी के विस्तार से पुरुलिया की भूमिका भारत के Energy, Mineral and Cement Corridor में और मजबूत होने की उम्मीद है। बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार कर सकती है।
बढ़ेगी माल ढुलाई की क्षमता
11 किलोमीटर की इस बाईपास लाइन से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में भी महत्वपूर्ण इजाफा होगा। परियोजना के पूरा होने पर करीब 8.88 मिलियन टन सालाना अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता जुड़ने का अनुमान है। इसके साथ प्रतिदिन लगभग 6.065 फ्रेट रेक की आवाजाही संभव हो सकेगी।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
रेलवे परियोजना से निर्माण गतिविधियों के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा बेहतर माल परिवहन व्यवस्था से जुड़े उद्योगों और कारोबार को भी फायदा मिल सकता है, जिससे पुरुलिया की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है।
औद्योगिक फ्रेट नेटवर्क में पुरुलिया की बढ़ेगी भूमिका
इस परियोजना को पुरुलिया के लिए महज एक नई रेल लाइन के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्र को देश के बड़े औद्योगिक फ्रेट नेटवर्क से और मजबूती से जोड़ने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के विकास मॉडल के तहत इसे पुरुलिया में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक कनेक्टिविटी को बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।