कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में सत्ता परिवर्तन और बीजेपी सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर 'आरजी कर फाइल्स' को दोबारा खोल दिया गया है। इसी कड़ी में अब जांच में भूमिका संदेहास्पद पाए जाने पर निलंबित किए गए तीन वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों की निलंबन अवधि (सस्पेंशन) को और 4 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, तत्कालीन डीसी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी और तत्कालीन डीसी (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता के निलंबन की अवधि बढ़ाई गई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
कॉल और मैसेज खंगाल रहे हैं जांचकर्ता
जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि घटना के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री या सरकार के किसी मंत्री की तरफ से इन आईपीएस अधिकारियों को फोन या मैसेज के जरिए कोई खास निर्देश तो नहीं दिए गए थे। यदि इसके पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो इन अधिकारियों के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या था मामला?
8 अगस्त 2024 की रात आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में नाइट ड्यूटी के दौरान एक युवा महिला डॉक्टर बर्बरता का शिकार हुई थीं। शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने जांच करते हुए संजय राय नाम के एक सिविक वॉलंटियर को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। हालांकि, सीबीआई ने इस मामले में किसी नई गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की, लेकिन अदालत की सुनवाई के बाद सियालदह कोर्ट ने संजय राय को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
पीड़िता के माता-पिता जांच से असंतुष्ट मृतका के माता-पिता इस जांच से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि इस जघन्य अपराध में कई अन्य रसूखदार लोग भी शामिल थे, जिनकी भूमिका को अब तक सामने नहीं लाया गया है। नई सरकार अब इसी संभावना को खंगालने में जुटी है।
CBI की SIT टीम कर रही है री-कंस्ट्रक्शन
कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई के पूर्वी संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम घटना की रात से लेकर पीड़िता के अंतिम संस्कार तक के हर एक घटनाक्रम की बारीकी से कड़ियां जोड़ रही है।
इस जांच के तहत हाल ही में पानीहाटी के पूर्व टीएमसी (TMC) विधायक निर्मल घोष से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा, शवदाह गृह के प्रभारी भोलानाथ पात्र का बयान भी दर्ज किया गया है। श्मशान अधिकारियों का दावा है कि अंतिम संस्कार परिवार की सहमति से ही किया गया था। फिलहाल, सीबीआई की रडार पर ये तीनों निलंबित आईपीएस अधिकारी हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।