कोलकाता: स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं, राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, 'स्वास्थ्य साथी' योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं और जूनियर डॉक्टरों के एक वर्ग की गतिविधियों पर विस्तार से बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2047 तक 'टीबी मुक्त भारत' का संकल्प, निक्षय मित्र बनने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) उन्मूलन कार्यक्रम भारत सरकार का एक बड़ा संकल्प है, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के नेतृत्व में भारत को टीबी मुक्त बनाना है।
- पश्चिम बंगाल में 2015 से 2026 के आंकड़ों के अनुसार, टीबी के मामलों और मरीजों की संख्या में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
- केंद्र सरकार के 'निक्षय मित्र' कार्यक्रम के तहत सक्षम और मध्यमवर्गीय परिवारों से टीबी मरीजों को सहयोग देने की अपील की गई है। मंत्री के अनुसार, 3,000 रुपए के एकमुश्त सहयोग से मरीज के पोषण और खान-पान में मदद की जा सकती है।
- उन्होंने दावा किया कि भाजपा के सभी 209 विधायक निक्षय मित्र बन चुके हैं। साथ ही, उन्होंने राज्य के सभी 294 विधायकों और सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस अभियान में योगदान देने की अपील की।
'स्वास्थ्य साथी' में 25,000 से 30,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप, फॉरेंसिक ऑडिट जारी
'स्वास्थ्य साथी' योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर शारद्वत मुखोपाध्याय ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 20,000 करोड़ रुपए का आंकड़ा भी कम हो सकता है और कथित घोटाले की राशि 25,000 से 30,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है।
- उन्होंने इसे 'हिमशैल का सिरा' बताते हुए कहा कि जांच में अभी शुरुआती तथ्य ही सामने आए हैं।
- उनके अनुसार, जांच के दौरान फर्जी कार्ड, फर्जी लाभार्थियों, फर्जी बीमारियों, डॉक्टरों के कथित फर्जी हस्ताक्षरों, फर्जी अस्पतालों और बीमा दावों से जुड़े संभावित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है।
- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पूरे मामले का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद विस्तृत तथ्य सामने रखे जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता का फिलहाल कोई संकेत नहीं मिला है। इसलिए ठोस सबूत के बिना किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
ड्यूटी बेचने वाले डॉक्टरों को चेतावनी, इंटर्नशिप रद्द होने का खतरा
जूनियर डॉक्टरों और शिफ्ट स्वैपिंग के मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ डॉक्टरों की गतिविधियों को पूरी जूनियर डॉक्टर बिरादरी का प्रतिनिधित्व नहीं माना जाना चाहिए।
- उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जूनियर डॉक्टर अपनी सरकारी ड्यूटी के बदले पैसे लेकर दूसरे लोगों से काम करवा रहे हैं और रिप्लेसमेंट के नाम पर कथित तौर पर अवैध कारोबार चला रहे हैं।
- उन्होंने दावा किया कि दुर्गा पूजा के दौरान प्रति घंटे ड्यूटी की दर 180 रुपए से बढ़ाकर 900 रुपए तक कर दी गई थी।
- स्वास्थ्य मंत्री ने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के अनुशासन संबंधी नियमों के तहत ऐसी गतिविधियों पर कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित डॉक्टरों ने यह गतिविधि बंद नहीं की, तो उनकी इंटर्नशिप अधूरी रह सकती है और उनके डॉक्टर बनने में बाधा आ सकती है।
अंत में, उन्होंने जूनियर डॉक्टरों से विरोध-प्रदर्शन छोड़कर ईमानदारी से मरीजों की सेवा में लौटने की अपील की