नई दिल्ली. कथित ‘कैश फॉर जॉब’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह राहत स्थायी नहीं है और इसका लाभ तभी तक मिलेगा, जब तक याचिकाकर्ता जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करते रहेंगे। पीठ ने यह भी कहा कि सुमित रॉय को जांच के लिए जब भी बुलाया जाए, उन्हें उपस्थित होना होगा तथा जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करनी चाहिए। न्यायालय के इस आदेश से फिलहाल गिरफ्तारी की आशंका टल गई है, जबकि मामले की जांच पूर्ववत जारी रहेगी।
याचिकाकर्ता की ओर से जांच में पूरा सहयोग करने का आश्वासन
सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने न्यायालय के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि उनके मुवक्किल जांच एजेंसी द्वारा जारी प्रत्येक निर्देश का पालन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे। याचिका में यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए न्यायालय से अंतरिम संरक्षण की मांग की गई है, ताकि जांच के दौरान कानून के दायरे में रहकर सहयोग किया जा सके। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि गिरफ्तारी के बजाय जांच में सहयोग सुनिश्चित करने का अवसर दिया जाना न्यायसंगत होगा।
राज्य सरकार ने हिरासत में पूछताछ को बताया आवश्यक
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय में दलील दी कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है और इसकी प्रभावी जांच के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। उन्होंने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी को पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि करनी है, जिसके लिए केवल सामान्य पूछताछ पर्याप्त नहीं होगी। सरकार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि जब पुलिस सुमित रॉय को गिरफ्तार करने पहुंची, तब उसे बाधाओं का सामना करना पड़ा। इन दलीलों के आधार पर राज्य सरकार ने अदालत से गिरफ्तारी पर रोक न लगाने का आग्रह किया।
राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा मामला
कथित ‘कैश फॉर जॉब’ मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक चर्चित प्रकरण बन चुका है। इस मामले में विभिन्न स्तरों पर जांच जारी है और समय-समय पर कई राजनीतिक तथा प्रशासनिक व्यक्तियों के नाम भी सामने आते रहे हैं। चूंकि सुमित रॉय तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक हैं, इसलिए इस मामले की प्रत्येक न्यायिक कार्रवाई राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि अभी तक न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और जांच जारी रहने दी है।
अंतरिम राहत से जांच पर नहीं पड़ेगा असर, आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि जांच प्रक्रिया समाप्त हो गई है या याचिकाकर्ता को मामले से पूर्ण राहत मिल गई है। अदालत ने केवल गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लगाई है और जांच एजेंसी को अपनी कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति, एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल सभी पक्षों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और न्यायालय आगे इस मामले में क्या रुख अपनाता है।